Workers | कर्मचारी

  इसका शीर्षक पड़ते ही आपको लगता होगा कि इसमे क्या राजनीति है, ये दोनों तो मजदूरों के त्यौहार है, यह दोनों त्यौहार मेहनतकश वर्ग के ही है, फिर इसमे दो वर्गीय राजनीति कहॉ से आ गई । यह बात समझ नहीं आई, यही बात तो, आज तक समझ नहीं आई, न हमने कभी वर्गीय […]

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1 मई मजदूर दिवस अमर रहे । जब मेहनतकश मेहनत करता है तब रूपया पैदा होता है । रूपया पैदा करता है, मगर वह हमेशा निर्धन, बिन रूपया, रहता है । ये कैसा खेल है जो समझ नहीं आता है । जो पैदा करता है रुपया, उस रूपया का मालिक कोई दूसरा होता है । […]

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1 मई मजदूर दिवस को संकल्प लो, अपने हक के लिए लड़ेगे । अपने खून को गर्म करो, गुलामी से बाहर निकलो आज मेहनतकश वर्ग के अधिकारो को खत्म करने की खुलेआम मुहिम चल रही है, सरकारे खुले रूप से मजदूर, कर्मचारियों को गुलाम बनाने के कानून बना रहे हैं, मेहनत करने वालो का भविष्य […]

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  न्यूनतम वेतन व शासकीय कर्मचारी बनाने का संघर्ष जारी रहेगा आज मुख्यमंत्री द्वारा आंगनवाडी कर्मियों के मानदेय में बढोत्तरी कर कार्यकर्ता को 10 हजार एवं सहायिका को 5 हजार रुपये मानदेय देने की घोघणा को सीटू ने आंगनवाडी कर्मियों के संघर्ष की जीत बताया। ज्ञातव्य है कि आंगनवाडी कार्यकर्ता सहायिका एकता यूनियन सीटू ने लम्बे समय से आंगनवाडी […]

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    नरेंद्र मोदी जी, नौजवानो की जिंदगी को गुलाम बनाने, उनका पूंजीपति द्वारा खुलकर शोषण दमन अत्याचार करने के सारे रास्ते खोल रहे हैं, उसी के तहत एक और गुलामी का नियम बनाया, 18 मार्च 2018 को केन्द्र सरकार ने, स्थाई आदेश ( स्टैडिग ऑर्डर) में कर्मचारी की परिभाषा में, नया श्रेणी फिक्स टर्म […]

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  10 मार्च को संयुक्त मंच की ओर से मुख्यमंत्री से सम्पन्न चर्चा के बाद तय आधार पर आज दिनांक 29 मार्च 2018 को आंगनवाडी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच के प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री से चर्चा हेतु आमंत्रित किया गया। आंगनवाडी कार्यकर्ता सहायिका एकता यूनियन मध्य प्रदेश (सीटू ) की प्रदेश अध्यक्ष विद्यो खंगार, महासचिव किशोरी […]

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  आंगनवाडी कर्मियों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने, तब तक 18000 रुपये न्यूनतम वेतन देने, मध्य प्रदेश न्यूनतम वेतन सलाहकार परिषद के निर्णय के आधार पर न्यूनतम वेतन की अधिसूचना तुरन्त जारी करने, सेवा निवृत्ति पर 3000 रुपये पेंशन देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल के शाहजहानी पार्क में 7 आंगनवाडी यूनियनों के […]

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  श्रम कानूनो में पहले केवल दो श्रेणी भी, एक परमानेन्ट और दूसरा केजुअल, इसके अलावा स्टाफ और मैनेजर अलग कैटागिरी थी । परमानेन्ट श्रमिक, आज भी है, जिसको नौकरी से बिना कारण के निकाल नहीं सकते, हर वर्ष वेतन वृद्धि करना है । केजुअल केवल सीजनल कंपनियों के लिए थे, जहॉ काम कम ज्यादा […]

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