Political | राजनैतिक

समाज के कुछ शातिर लोगों ने, राजनीति को गंदा बना दिया, राजनीति गंदी नहीं है, मगर उसको ऐसा बनाया गया ताकी अच्छे लोग राजनीति से दूर रहें, सच में राजनीति ही भगवान है, राजनीति ही अल्लाह है, राजनीति ही ईसा मसीह है, राजनीति वह चीज है, जो हर व्यक्ति के जीवन में सब लाती है […]

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●आख़िरी बात वह फतवा जो इन दिनों फैशन में है कि “भारत के संगठित वाम द्वारा जाति मुद्दों को सक्रियता के एजेंडे में शामिल करना वर्ग संघर्ष की बुनियादी अवधारणा से भटकाव है, राजनीतिक अवसरवाद है ।” इसमें से पहली बात पर ऊपर पर्याप्त चर्चा की जा चुकी है । रही दूसरी बात, तो इसे […]

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● जैसे, आर्थिक और सामाजिक दोनों तरह के शोषण से लड़ने के बारे में उनकी समझ कमोबेश व्यावहारिक थी । उन्होंने कास्ट और क्लास दोनों से लड़ने की बात की । एससी फेडरेशन तो उन्होंने 1942 में बनाया था । इससे पहले 1936 में उन्होंने पहली पार्टी – इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी – बनाई थी। इसका […]

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● ऐसा पढ़ते ही शुध्द (??) वाम एकदम बिलबिला जाता है । अरे, ऐसा कैसे हो सकता है । ऐसा तो किसी किताब में लिख्खाईच नहीं है !! तो किताबों में ये कहाँ लिखा है कि इन किताबों में अ से ज्ञ तक ए टू जेड “सब कुछ” लिखा है ? बल्कि किताबों में तो […]

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● इसलिए कि जाति सिर्फ और केवल सामाजिक संरचना नहीं है । यह मोटा मोटी, समय द्वारा जांची परखी जा चुकी आर्थिक संरचना भी है। डी डी कौशाम्बी के शब्दों में कहें तो ” जाति उत्पादन के आदिम स्तर पर वर्ग का नाम है । सामाजिक चेतना का इस तरह से संयोजन करने वाली पद्वत्ति […]

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● कुछ “सतत क्रांतिकारी” विद्वान , डॉ. बी आर अम्बेडकर पर आरोप लगाते हैं कि “अम्बेडकर ने जातिवाद को मजबूत किया – इतिहास के स्वाभाविक विकास-क्रम में जो जातिवाद नष्ट हो रहा था, उसे रोका – वर्ण-व्यवस्था को और आधार देते हुए वर्ण-विभाजन को बढ़ावा दिया – वर्ग-संघर्ष को कमजोर किया – जातिगत चेतना को […]

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