Political | राजनैतिक

आदरणीय कोविंद जी, समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद. जैसा कि आपको विदित है, २ अप्रैल को देश भर में अनेक दलित संगठनो की और से ‘भारत बंद’ का आवाहन किया गया था और इस आवाहन को अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त हुई थी. बंद के आवाहन के पीछे देश-भर की दलित-आदिवासी जनता के अतिरिक्त […]

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  पूँजीवादी, राजनीति का आज के समय का सबसे बड़ा हथियार ध्रुवीकरण है, जिसको बड़े समय से पूँजीवादी राजसत्ता इस्तेमाल करती रही, अंग्रेजो ने भी इसका इस्तेमाल किया, यह बहुत ही महत्वपूर्ण और कठिन विषय है, इस विषय को समझते है । साथियों, ध्रुवीकरण करने के लिए दो वर्गो में ध्रुवीकरण किया है, जिसमें एक […]

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  पूँजीवादी व्यवस्था और समाजवादी व्यवस्था में सब कुछ बिल्कुल अलग है, इसमें दोनों व्यवस्थाओ में अपने वर्गीय हित के लिए काम करना सुनिश्चित है, दोनों में यह स्पष्ट दिखाता है । इसी आधार पर दोनों की आर्थिक नीतियाँ अलग अलग है । मुख्य रूप से कुछ तथ्य है, जैसे पू्ंजीवादी व्यवस्था का मुख्य आधार […]

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  07. किसानों के अब तक के सारे कर्जे माफ करो, कोई भी किन्तु परन्तु नहीं, इसके बाद उनकी हर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करो, ऐसा कानून बनाओ, इससे कम दर पर कोई भी नहीं खरीदेगा, इसके लिए तगड़ा कानून बनाओ, इसके साथ में लागत कम करने के लिए खाद बीज कीटनाशक को […]

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  07. किसानों के अब तक के सारे कर्जे माफ करो, कोई भी किन्तु परन्तु नहीं, इसके बाद उनकी हर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करो, ऐसा कानून बनाओ, इससे कम दर पर कोई भी नहीं खरीदेगा, इसके लिए तगड़ा कानून बनाओ, इसके साथ में लागत कम करने के लिए खाद बीज कीटनाशक को […]

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  आज हम बहुत ही गम्भीर विषय पर बात कर रहे हैं, आज हमारे देश में कम्युनिस्ट विचारधारा को इस प्रकार से प्रस्तुत किया जा रहा है जैसे ये लोग देश विरोधी ताकते हैं और देशद्रोही लोग हैं, देश को बर्बाद करना चाहते हैं, देश के अंदर इस्लाम लाना चाहते हैं, पाकिस्तान और चीन के […]

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  भौतिकवादी दर्शन में मनुष्य के पूरे जीवन जीने की पद्धति है, जिससे मनुष्य बहुत ही खुशहाली से जीवन जीता है । जिस प्रकार से भाववादी दर्शन मैं जीवन जीने की पद्धति है उसी प्रकार से भौतिकवादी दर्शन के अंदर भी मनुष्य के जीवन जीने की पद्धति है, जिसको आज हम समझेगे । भौतिकवादी दर्शन […]

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उस समय के जो पूँजीवादी राजसत्ता के दार्शनिक थे, उन्हौने मार्क्स की थ्योरी की आलोचना की और उन्हौने पूँजीवादी सुधारो के बारे में बताया और यह समझाने की कोशिश की, कि अब दुनियां में क्रांति नहीं हो सकती, और मेहनतकश वर्ग अब अलगाव नहीं करेगा, क्योंकि पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था ने बहुत सारे सुधार किये है, […]

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