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  आज राजनीति में जहॉ पूँजीवादी पार्टियॉ, रुपयो की दम पर चुनाव जीतते है, करोड़ो रुपये लगाते हैं, चुनाव जीतने के बाद, कई सौ करोड़ कमाते है, इनके लिए चुनाव एक धंधा बन गया है, बिजनेस बन गया है । ऐसे समय में आज हमारे देश में ऐसी राजनैतिक विचारधारा है, जिसमें आज भी ईमानदारी […]

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  आज भाजपा और कांग्रेस सहित सभी राजनैतिक दलो में आज परिवारवाद है, चुनाव की कोई भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया कही नहीं है, जिनके पास पैसा हो, वही नेता बनता है, बिना पैसे के पूँजीवादी पार्टियों में आम आदमी का कोई बजूद नही है, न ही आप उच्च पदो तक पहुँच सकते हैं । इसी प्रकार […]

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  आज जब पूँजीवादी पार्टियॉ, मिश कॉल से सदस्यता अभियान चला रही है, पार्टी में भर्ती करने के कोई नियम नहीं बचे, जो भ्रष्टाचार करता है, उसका स्वागत होता है, जो अपराधिक काम करते है, गुंडा गर्दी करते हैं, हत्या, बलात्कार जैसे काम करते हैं, उनका स्वागत बड़े बड़े दल कर रहे है, मोहल्लो के […]

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  जब लोगों की, धर्म और आस्था से खेला जाता है, उसको बार बार उधेड़ा जाता है, भावनाओ को भड़काया जाता है, तो पक्का समझ लीजिए की, राजसत्ता, पूँजीपति, मिडियॉ सब मिलकर, हमारे मुख्य आर्थिक सवालो से हटाना चाहते हैं और बड़ी साजिश के साथ देश की लूट होने वाली है । धर्म का इस्तेमाल […]

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  1992 में जब पूरा देश जल रहा था, तब देश को लूटने, देश के आर्थिक संसाधनों पर कब्जा करने, आम जनता को शोषण करने वाली नई आर्थिक नीतियाँ ध्वनि मत से पारित हो रही थी, यही साजिश थी, इस दंगो की । 1990 में हमारे देश में इन नीतियों को लाया गया था । […]

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  जब राजनिति को गंदा कहा जाए, नेताओ को बेइमान, भ्रष्टाचारी, कहा जाए, उस समय में कामरेड एक आदर्श के रूप में समाज के सामने है, आज हम गर्व से कह सकते है कि हम कामरेड है । एक कामरेड अपना जीवन कैसे जीते है, चलिए देखते हैं । 01. कामरेड बनने की पहली शर्त […]

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  इसका अर्थ है कि “फोरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट” हिंदी में कहते हैं, “प्रत्यक्ष विदेशी निवेश” इसका मतलब है कि विदेशी कंपनियों को अपने देश में सभी क्षेत्र में 100 प्रतिशत अपना व्यापार करने की छूट, अभी हम केवल फुटकर व्यापार पर बात करेंगे । हमारे देश में विदेशी कंपनियों को सब जगह व्यापार करने की […]

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  व्यापारी वर्ग, घोषित रूप से अपने आप को, भाजपा और कांग्रेस का समर्थक मानता है, कई लोग इन पार्टियों में बड़े बड़े पदों पर बैठे हैं, मगर आज इस बुरी स्तिथि में भी व्यापारियों की हित की नीतियों की आवाज़ नहीं उठा पा रहे है, आज फुटकर व्यापार लगभग, आधे से कम रह गया […]

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