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संघर्ष ही विकल्प है, लड़ेगे, तभी जीतेगे ।

तीन दिन के संसद महापड़ाव ने एक बड़े संघर्ष को शंखनाद कर दिया, अगली अनिश्चित कालीन हड़ताल करने का, अल्टीमेटम दिया गया, मोदी सरकार को गलत दिशा में जाने से रोकने के लिए, यही एक रास्ता है । लाखों लोगों ने दिल्ली में शामिल होकर ये साबित किया कि ये बड़े संघर्ष का आगाज हो […]

लाल झंडे के लोग कितने अनुशासित है, यह महाराष्ट्र किसान आन्दोलन ने दिखाया ।

  महाराष्ट्र किसान आन्दोलन ने बहुत सारे मैसेज दिए, जिसमें एक बड़ा मैसेज दिया, कि कई हजारों की संख्या में सड़को पर निकले 185 किलोमीटर पैदल यात्रा की, मगर सड़को पर कोई परेशानी नहीं हुई, कोई विवाद नहीं हुआ । बच्चों की वोर्ड की परीक्षा प्रभावित न हो, उसके लिए रात में दो बजे तक […]

ऐसे बनते है ईमानदार नेता, जानिए वामपंथी दलो का सदस्य कैसे बनते है, हर वर्ष होता है नवीनीकरण

  आज जब पूँजीवादी पार्टियॉ, मिश कॉल से सदस्यता अभियान चला रही है, पार्टी में भर्ती करने के कोई नियम नहीं बचे, जो भ्रष्टाचार करता है, उसका स्वागत होता है, जो अपराधिक काम करते है, गुंडा गर्दी करते हैं, हत्या, बलात्कार जैसे काम करते हैं, उनका स्वागत बड़े बड़े दल कर रहे है, मोहल्लो के […]

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मोदी सरकार के चार साल, एक तरफ जश्न और दूसरे तरफ मातम

*मोदी सरकार ने चार साल पूरे कर लिये है, जिसमे उन्हौने जिनके लिए काम किया वो जश्न मना रहे है जिनको लूटा, बर्बाद किया, वो मातम मना रहे है, यही राजनीति का वर्गीय चरित्र है, ये दो वर्गीय दुनियां है, हमारे देश में नरेन्द्र मोदी जी की सरकार शुद्ध पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था की पार्टी है, […]

राजनीति भाग – 05.4, पूँजीवादी व्यवस्था के नकारात्मक और सकारात्मक परिणाम ( ये चौथा और आखिरी हिस्सा हैं)

  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था के बहुत घातक परिणाम आते हैं, जो इस पूँजीवादी व्यवस्था में निश्चित होते हैं, इसलिए पूँजीवादी व्यवस्था, इनसे भटकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते है, आम जनता को दिमागी रूप से ये एहसास कराते है कि इस सब के लिए में खुद जिम्मेदार हूँ, क्योंकि मेरा नसीब किस्मत खराब है […]

राजनीति भाग – 05.3 पूँजीवादी व्यवस्था के नकारात्मक और सकारात्मक परिणाम ( ये तीसरा हिस्सा हैं)

  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था के बहुत घातक परिणाम आते हैं, जो इस पूँजीवादी व्यवस्था में निश्चित होते हैं, इसलिए पूँजीवादी व्यवस्था, इनसे भटकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते है, आम जनता को दिमागी रूप से ये एहसास कराते है कि इस सब के लिए में खुद जिम्मेदार हूँ, क्योंकि मेरा नसीब किस्मत खराब है […]

राजनीति भाग – 05.2 पूँजीवादी व्यवस्था के नकारात्मक और सकारात्मक परिणाम (दूसरा हिस्सा)

  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था के बहुत घातक परिणाम आते हैं, जो इस पूँजीवादी व्यवस्था में निश्चित होते हैं, इसलिए पूँजीवादी व्यवस्था, इनसे भटकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते है, आम जनता को दिमागी रूप से ये एहसास कराते है कि इस सब के लिए में खुद जिम्मेदार हूँ, क्योंकि मेरा नसीब किस्मत खराब है […]

राजनीति भाग – 05.1 पूँजीवादी व्यवस्था के नकारात्मक और सकारात्मक परिणाम का पहला हिस्सा ।

  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था के बहुत घातक परिणाम आते हैं, जो इस पूँजीवादी व्यवस्था में निश्चित होते हैं, इसलिए पूँजीवादी व्यवस्था, इनसे भटकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते है, आम जनता को दिमागी रूप से ये एहसास कराते है कि इस सब के लिए में खुद जिम्मेदार हूँ, क्योंकि मेरा नसीब किस्मत खराब है […]

राजनीति भाग – 04, पूँजीवाद की नई आर्थिक नीतियाँ, New Economic Policy Of Capitalism

  इन नई आर्थिक नीतियों का इजात अमेरिका ने किया, जिसको उन्हौने पूरी दुनिया पर लागू करने की योजना बनाई, जिसमे उनके तीन लक्ष्य थे, एक था उनके देश में जो बड़ी बड़ी कंपनियां है उनके पास बड़ी पूंजी एकत्रित हो गई थी, जिसके लिए बाजार चाहिए था, ताकि उसको लगाकर और मुनाफा कमाया जा […]

राजनीति भाग – 03, पूँजीवादी राजसत्ता और उसके अभिन्न अंग, फ्री इकोनमी क्या है ।

  पूँजीवादी राजसत्ता सत्ता कैसे बनती है हमें इस तथ्य को समझना है, पूँजीवादी व्यवस्था में कुछ पिलर होते हैं, जिनको क्रमवार लिख रहे है । पूंजीपति जिसके पास पूंजी है । शासक, जो पूँजीवादी राजसत्ता चलाते हैं । धर्म, जो पूँजीवादी व्यवस्था में जनता को दिमागी रूप से कन्ट्रोल करते हैं । सेना, जिससे […]

राजनीति भाग -02, पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था का इतिहास History Of Capitalism

  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था बहुत ही पुरानी है, इसमे कबीले की व्यवस्था के बाद, गुलामो की व्यवस्था के साथ राजशाही और राजशाही के बाद पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था आई थी जो आज भी चल रही है, पहले, सम्पति और संसाधनों का मालिक राजा होता था, जैसे ही इंगलैड में औद्योगिक विकास हुआ, जिसके बाद दुनियां भर […]