A Farmer | एक किसान

बस देख ली आजादी हामनै म्हारे हिन्दुस्तान की ।
सबतैं बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ।।
न्यूं कहो थे हाळियां नै सब आराम हो ज्यांगे -खेतों में पानी के सब इंतजाम हो ज्यांगे ।
घणी कमाई होवैगी, थोड़े काम होज्यांगे -जितनी चीज मोल की, सस्ते दाम हो ज्यांगे ।
आज हार हो-गी थारी कही उलट जुबान की ।
सबतैं बुरी हालत सै आज मजदूर और किसान की ॥

2 comments

    • Admin on November 7, 2017 at 10:44 pm
    • Author

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    nice poem.

    • Ashish on November 14, 2017 at 3:38 pm

    Reply

    True

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