Monthly Archive: May 2018

  साथियों, इसमे हमें पूरी व्यवस्था के विकास को समझना है, जो दुनियां का सामाजिक विकास हुआ, समाजवादी व्यवस्था के लिए पूर्व में भी कई लोगों ने आवाज उठाई, उनकी आवाज़ को दबा दिया गया और आवाज़ उठाने वालों को खत्म कर दिया गया । हम बहुत पुराने इतिहास पर बात नहीं करेंगे । हम […]

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*मोदी सरकार ने चार साल पूरे कर लिये है, जिसमे उन्हौने जिनके लिए काम किया वो जश्न मना रहे है जिनको लूटा, बर्बाद किया, वो मातम मना रहे है, यही राजनीति का वर्गीय चरित्र है, ये दो वर्गीय दुनियां है, हमारे देश में नरेन्द्र मोदी जी की सरकार शुद्ध पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था की पार्टी है, […]

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  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था के बहुत घातक परिणाम आते हैं, जो इस पूँजीवादी व्यवस्था में निश्चित होते हैं, इसलिए पूँजीवादी व्यवस्था, इनसे भटकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते है, आम जनता को दिमागी रूप से ये एहसास कराते है कि इस सब के लिए में खुद जिम्मेदार हूँ, क्योंकि मेरा नसीब किस्मत खराब है […]

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  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था के बहुत घातक परिणाम आते हैं, जो इस पूँजीवादी व्यवस्था में निश्चित होते हैं, इसलिए पूँजीवादी व्यवस्था, इनसे भटकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते है, आम जनता को दिमागी रूप से ये एहसास कराते है कि इस सब के लिए में खुद जिम्मेदार हूँ, क्योंकि मेरा नसीब किस्मत खराब है […]

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  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था के बहुत घातक परिणाम आते हैं, जो इस पूँजीवादी व्यवस्था में निश्चित होते हैं, इसलिए पूँजीवादी व्यवस्था, इनसे भटकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते है, आम जनता को दिमागी रूप से ये एहसास कराते है कि इस सब के लिए में खुद जिम्मेदार हूँ, क्योंकि मेरा नसीब किस्मत खराब है […]

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  पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था के बहुत घातक परिणाम आते हैं, जो इस पूँजीवादी व्यवस्था में निश्चित होते हैं, इसलिए पूँजीवादी व्यवस्था, इनसे भटकाने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते है, आम जनता को दिमागी रूप से ये एहसास कराते है कि इस सब के लिए में खुद जिम्मेदार हूँ, क्योंकि मेरा नसीब किस्मत खराब है […]

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  इन नई आर्थिक नीतियों का इजात अमेरिका ने किया, जिसको उन्हौने पूरी दुनिया पर लागू करने की योजना बनाई, जिसमे उनके तीन लक्ष्य थे, एक था उनके देश में जो बड़ी बड़ी कंपनियां है उनके पास बड़ी पूंजी एकत्रित हो गई थी, जिसके लिए बाजार चाहिए था, ताकि उसको लगाकर और मुनाफा कमाया जा […]

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  पूँजीवादी राजसत्ता सत्ता कैसे बनती है हमें इस तथ्य को समझना है, पूँजीवादी व्यवस्था में कुछ पिलर होते हैं, जिनको क्रमवार लिख रहे है । पूंजीपति जिसके पास पूंजी है । शासक, जो पूँजीवादी राजसत्ता चलाते हैं । धर्म, जो पूँजीवादी व्यवस्था में जनता को दिमागी रूप से कन्ट्रोल करते हैं । सेना, जिससे […]

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