Monthly Archive: February 2018

  आंगनवाडी कर्मियों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देने, तब तक 18000 रुपये न्यूनतम वेतन देने, मध्य प्रदेश न्यूनतम वेतन सलाहकार परिषद के निर्णय के आधार पर न्यूनतम वेतन की अधिसूचना तुरन्त जारी करने, सेवा निवृत्ति पर 3000 रुपये पेंशन देने सहित विभिन्न मांगों को लेकर भोपाल के शाहजहानी पार्क में 7 आंगनवाडी यूनियनों के […]

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  अंधविश्वास मनुष्य के दिमाग को शून्य कर देता है, उसकी सोचने समझने और तर्क करने की शक्ति को खत्म कर देता है, यही से मनुष्य के दिमाग को अपने वश में करने का काम किया जाता है, इसके बाद उस मनुष्य से वो जो चाहे वो करवा सकते हैं, उसकी सोचने समझने तर्क करने […]

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  नरेंद्र मोदी जी की पूँजीवादी सरकार, देश के सभी संसाधनों को पूँजीपतियो को बेच देने के लिए, बहुत ही तेजी से काम कर रही है, बहुत सारी कंपनी, अटल जी की सरकार के समय बेच चुके हैं, उस समय चुनाव हारने के बाद अब फिर से देश को बेचने का मौका मिला है, जिस […]

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  जब भी घोटाले होते हैं तो हमको लगता कि हमारा तो कुछ नहीं गया, वो तो बैक के पैसे ले गया । हमें ऐसा लगता है कि राजनीति से इसका कोई सम्बन्ध नहीं है, ये तो कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने लालच में आकर किया है, यही जिम्मेदार है । मगर ऐसा बिल्कुल नहीं […]

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  श्रम कानूनो में पहले केवल दो श्रेणी भी, एक परमानेन्ट और दूसरा केजुअल, इसके अलावा स्टाफ और मैनेजर अलग कैटागिरी थी । परमानेन्ट श्रमिक, आज भी है, जिसको नौकरी से बिना कारण के निकाल नहीं सकते, हर वर्ष वेतन वृद्धि करना है । केजुअल केवल सीजनल कंपनियों के लिए थे, जहॉ काम कम ज्यादा […]

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  परमानेन्ट नौकरी खत्म ठेकेदारी प्रथा में काम करना है,या ट्रेनिंग या अप्रेन्टिश में काम करना है, या फिक्स टर्म में काम करेंगे, दो साल या तीन साल में नौकरी से निकाल दिया जायेगा । फिर नई नौकरी तलाशो । वेतन बढ़ाने की बात की, घर पर कोई बीमार है, और की छुट्टी मारी, या […]

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  आज आम गरीब आदमी की काम न मिलने से दयनीय स्तिथि बन गई है, एक तरफ काम नहीं मिलने से जीने के लिए भी धन नहीं जुटा पा रहे है, काम पैदा करने में हमारी ये सरकार पूरी तरीके से विफल रही है । इसका दूसरा एक बिकराल रूप और सामने आया है कि […]

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  आज पूरी नौजवान पीढ़ी सहित सारी जनता, मानसिक रूप से वर्तमान गुलामी को स्वीकारती दिख रही है, पूँजीवादी पार्टियों ने असल सवालो को हमारे दिमाग से हटा दिया है, राजनीति और धर्म का ऐसा घालमेल किया है कि हमारी चेतना से ही असल सवाल उड़ गए । आज, नौजवान इतना परेशान है, लूट दुर्दशा […]

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