Monthly Archive: November 2017

  इसका अर्थ है कि “फोरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट” हिंदी में कहते हैं, “प्रत्यक्ष विदेशी निवेश” इसका मतलब है कि विदेशी कंपनियों को अपने देश में सभी क्षेत्र में 100 प्रतिशत अपना व्यापार करने की छूट, अभी हम केवल फुटकर व्यापार पर बात करेंगे । हमारे देश में विदेशी कंपनियों को सब जगह व्यापार करने की […]

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  व्यापारी वर्ग, घोषित रूप से अपने आप को, भाजपा और कांग्रेस का समर्थक मानता है, कई लोग इन पार्टियों में बड़े बड़े पदों पर बैठे हैं, मगर आज इस बुरी स्तिथि में भी व्यापारियों की हित की नीतियों की आवाज़ नहीं उठा पा रहे है, आज फुटकर व्यापार लगभग, आधे से कम रह गया […]

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  ये कब होगा, क्या देश के अन्नदाता की सुरक्षा का काम सरकारे कब करेगी, नरेन्द्र मोदी जी ने भी चुनाव में घोषणा की थी, उसके बाद भी, किसानों की इस मॉग से सरकार भाग रही है, इसको भी जुमला बना दिया, मगर देश के किसानों का बड़ा आन्दोलन पूरे देश में शुरू हो गया […]

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  जब पूँजीपतियो का लाखों करोड़ रुपया माफ हो सकता है तो हमारे देश के किसानो का कर्जा माफ क्यों नहीं हो सकता, जब भी किसानों की बात आती है तो हमारी सरकारें कहने लगती हैं कि हमारे पास बजट नहीं है जब ये सरकारे इन पूंजीपतियों का हजारों करोड़ का कर्ज माफ करती हैं, […]

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  हमारा देश गॉव से बनता है, किसान से बनता है, किसान की खुशहाली के बिना, देश खुशहाल नही हो सकता, हमारे देश में सबसे लिए आयोग बनते है, उनकी सिफारिशे तुरंत लागू हो जाती है, मगर किसानों का बड़ी मुश्किल से एक आयोग बना, जिसका नाम था स्वामीनाथन आयोग, जिसने किसानों के बारे में […]

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जब से कृषि क्षेत्र में कोपरेट जगत, बड़े पूँजीपतियो को छूट दी गई, तब से सरकारो ने इन पूँजीपतियो के पक्ष में नीतियाँ बनाई और इन्हौने किसानों से मुनाफ़ा कमाया, यह जब से शुरू हुआ, जब से ये नई आर्थिक नीतियाँ निजीकरण, उदारीकरण, भूमंडलीकरण की नई पूँजीवादी सरकारो ने इन नीतियों को अपनाया । पहले, […]

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  हमारा देश की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है, लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या कही न कही खेती से जुड़ी है, बहुत बड़ी आबादी का रोजगार, और उनके जीने का संसाधन कृषि है, कृषि संकट का मतलब है कि पूरी अर्थव्यवस्था पर संकट आयेगा, यह समय आज आ गया है, आज पूरे देश के हर कोने के […]

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GST से किसका फायदा, किसका नुकसान ? एक देश, एक टेक्स। वन टेक्स, वन नेशन, जैसे सारे श्लोगन, सारे मैसेज, फिर जुमले हो गए । वही हुआ जो हमेशा होता आया, पूँजीपतियो, कोपरेट का फायदा, आम जनता की लूट । यही फिर हुआ, पूँजीवादी व्यवस्था में लूटने के नये नये रूप आते हैं ताकि जनता […]

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