विचारधाराओ का वर्गीय चरित्र

हमने पहले देखा कि समाज दो वर्गो में बटा है, जिसमें एक धन वाले यानि पूँजीपति, मतलब , पूँजीवादी व्यवस्था ।
दूसरा गरीब, मजदूर, किसान, कर्मचारी, आम जनता, मतलब, जन यानि जनता, जनता मतलब समाज, समाज मतलब समाजवादी व्यवस्था, समाजवादी व्यवस्था, मतलब वामपंथी विचारधारा, वामपंथी विचारधारा मतलब, वामपंथी राजसत्ता ।
यही दो वर्गीय दुनिया है, तीसरा कोई नहीं है ।

यह समझना बहुत जरूरी है कि दोनों वर्ग अपने वर्ग हित को नहीं छोड़ते, जब पूँजीवादी व्यवस्था होती है, तब पूँजीपतियो को फायदा पहुचाया जाता है, उनकी सुरक्षा की जाती है, दूसरे वर्ग को लूटने, शोषण करने, निचोड़ने की सारी छूटे दी जाती है, जैसा हमारे देश में हो रहा है, एक तरफ पूँजीपतियो की बेताहासा सम्पति बढ़ रही है, अम्बानी बन्धु, अडानी, जैसे सारे पूँजीपतियो की सम्पति बढ़ रही है, दूसरी तरफ देश में गरीबी, बेरोजगारी, भूमिहीनो, खेत मजदूरों, बेरोजगार नौजवान, बच्चे बच्चियो की संख्या बेताहासा बढ़ रही है, इसका दूसरा रूप भी देखिए देश की सरकारे पूँजीपतियो को मुफ्त में जमीन, करो में छूट, बैक से हजारों करोड़ का कर्ज, चुकाने की जरूरत नहीं है, बाद में सरकार उसको सरकारी खजाने से चुका देगी, ऐसा करके लाखों लाख हजारों करोड़ की संपत्ति इनको मुफ्त में दे देते है । तीसरा रूप देखिए बेरोजगार नौजवान, बच्चों, बच्चियो, का शोषण करके, कम दामो में काम कराके, पूँजीपतियो का मुनाफा बढ़ाना पक्का करवाते है, चौथा रूप देखिए पूँजीपति इस धन को हमारे देश से लूट कर दुनियां के दूसरे देशों में ले जाकर, अपना साम्राज्य बनाते है, ये पूँजीवादी राजसत्ताऐ दुनियां स्तर पर सहयोग करते ।
ऐसे न जाने कितने रूप है, जिनसे ये अपने वर्ग के हित को सुरक्षित करते है, उसको और ज्यादा मजबूत करते है ।

इसी प्रकार समाजवादी व्यवस्था दुनिया में जहाँ भी है, और जहाँ भी रही है, इन्हौने आम जनता के लिए, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, जीने के सभी संसाधन सबसे पहले जुटाए, जो भी धन पैदा हो, वो समाज की सरकार के पास हो, और वो सरकार समाज की बुनियादी जरुरतो पर पहले खर्च करे । ऐसी पॉलिसी बनाते की अमीरी, गरीबी की खाई कम हो, पूँजीपति कम हो, आम जनता के पास आय ज्यादा हो, उनके पास धन ज्यादा हो । इसी कारण ये जमीन बटवारा, स्थाई नौकरी, अच्छा वेतन, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य मुफ्त करने की मॉग करते है और जहाँ वामपंथी राजसत्ता है, वहाँ ये सब है । हमारे देश में भी, जहाँ भी वामपंथी सरकारे है, वहाँ पर बहुत सारी योजनाएं, पूँजीवादी व्यवस्था के राज्यो से अलग होगी, और अलग है ।

ये वर्गीय हित है, राजसत्ताओ की विचारधाराओ से ही वर्गीय हित निकलते है, इससे ये तो समझ में आया होगा कि नरेंद्र मोदी जी की पूँजीवादी व्यवस्था की सरकार आगे किस दिशा में जाएगी । अपने वर्ग हित के लिए और अधिक शोषण, अत्याचार करने की छूट देगी, आम जनता पर टेक्स लगायेगी, इसी का एक रूप जी एस टी है, आम जनता की पूंजी को एकत्रित करके, बैको के माध्यम से पूँजीपतियो को देगी, इसका उदाहरण नोटबंदी है, जिसके नाम पर आम जनता का सारा पैसा बेंको में जबरदस्ती जमा करवा लिया और पूरी व्यवस्था के संसाधनों पर मुनाफा कमाने के लिए पूँजीपतियो के हवाले करेंगी, जिसका उदाहरण ये प्राईवेट स्कूल और प्राईवेट अस्पताल है । ये सुनिश्चित है कि आगे नरेंद्र मोदी जी भी यही करेगे, यही कांग्रेस भी कर रही थी ।

उम्मीद है कि आप ये वर्गीय हित समझ गए होगें, यदि आप ये समझ गए तो पूँजीवादी, राजसत्ता, सरकार, क्या करेगी, क्या क्या नीतियाँ बनायेगी, आप स्वयं बड़ी आसानी से समझ लेगे, आप खुद सारे ऑकलन कर सकते है ।

हमारे देश में केवल वामपंथी मोर्चा ही नीतियों को बदलने की आवाज़ उठाते है, निजीकरण करने का विरोध करते है, शिक्षा स्वास्थ्य, को निजीकरण करने, सरकारी कंपनियों को पूँजीपतियो को बेचने का विरोध करते है, नौजवान के लिए रोजगार पैदा करने की वाली योजनाओं को लाने की मॉग करते है, बेरोजगारी को रोकने की, अच्छी वेतन वृद्धि करने, स्थाई नौकरी देने, की मॉग करते है, ऐसे न जाने कितनी सारी मॉगो के लिए पूरे देश में संघर्ष करते है, धरने प्रदर्शन, हड़ताले करते है ।
यही वर्गीय चरित्र है ।

एक उदाहरण और प्रस्तुत करते है, कि कांग्रेस और भाजपा की आर्थिक नीतियों में कोई फर्क है, कोई फर्क नहीं है, सिर्फ देश की जनता को मूर्ख बनाने के लिए, जो भी विपक्ष में रहता है, वह विरोध करेगा, सत्ता में आते ही वही करेगा, जो पूँजीवादी व्यवस्था के लिए जरूरी है, नरेंद्र मोदी सरकार इसका सबसे बड़ा सबूत है, इन्हौने चुनाव जीतने के बाद वही किया जो कांग्रेस कर रही थी, FDI सबसे बड़ा उदाहरण हैं, बाकी कुछ योजनाओं के नाम बदल दिए, जब तक पूँजीवादी विचारधारा की राजसत्ता की पार्टी, सत्ता में रहेगी, तब तक कुछ नहीं बदल सकता, नतीजा एक ही निकलेगा, इन अमीरो की संख्या बढ़ेगी, और देश में गरीबो और बेरोज़गार नौजवानो की संख्या बढ़ेगी । यही परिणाम निकलेगा, यह परिणाम क्यों निकलेगा, क्योंकि वर्गीय चरित्र ही उसका वही है, इसलिए वह अपने वर्ग हित में ही काम करेगे । उसके वर्ग हित के लिए देश प्राकृतिक संसाधनों, संपदा पर कब्जा, देश के आम जनता के धन पर कब्जा, सस्ता मजदूर, कर्मचारी, अधिकारी, जिसके लिए बेरोजगारो की फौज, नौकरी से भगाने की छूट, जैसे कोड़े, चाबुक चाहिए ये वर्गीय चरित्र है, शायद इस चरित्र को, जो भी इस आर्टिकल को पड़ेगा, समझ जायेगा । ये विचारधारा का अगला चेहरा है, जिसको हम कहते है, वर्गीय चरित्र, वर्गीय हित है ।

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