वामपंथी विचारधारा क्या है ?

नौजवानो को इस विचारधारा को समझना अत्यंत आवश्यक है, किसी भी देश में नौजवान देश के विकास की धुरी होते है, उनकी समझ, लगन, विचार ही राष्ट्र बनाते हैं, देख में अभी खूब लेफ्ट राइट चल रहा है, चाहे केरला, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, बिहार, पूरे देश में, एक तरफ वामपंथी विचारधारा प्रखर हो रही है, वहीं दूसरी पूंजीवादी व्यवस्था को कुचलने की कोशिश में लगी है, आज देश की नई पीढ़ी बहुत ही कम शब्दो में इसको समझना चाहती है, अब हम इसके मुख्य विषय पर बात करते है ।
वामपंथी विचारधारा क्या है ।

नौजवान साथियों, पूरी दुनिया में दो प्रकार की व्यवस्थाऐ है, जिसमें एक पूंजीवादी व्यवस्था है और दूसरी समाजवादी व्यवस्था, यही व्यवस्थाऐ समाज चलाती है, इसी यही समाज अपनी एक राजसत्ता बनाती है, जिसको हम सरकार कहते है, हर सरकार एक राजनैतिक पार्टी बनाती है, जिसकी अपनी एक विचारधारा धारा होती है।
विचारधारा वर्ग से पैदा होती है, वर्ग का आशय, धन से जुड़ा होता है, ये धन वर्ग बनाता है, इसलिए मुख्य रूप से दुनियां में दो वर्ग है, एक पूँजीपति वर्ग, दूसरा मेहनत कश वर्ग, जिसमें मजदूर किसान, दुकानदार, आम जनता, जो बहु संख्यक होती है ।
इन दोनों वर्गो में अलग अलग प्रकार की ताकते होती है, पूँजीपति वर्ग के पास धन होता है, समाजवादी वर्ग के पास जन होता है मगर धन नही होता, इसलिए इन दोनों वर्गो में कभी भी, वर्ग संघर्ष खत्म नही होते, पूँजीपति वर्ग और ज्यादा धन पर काबिज होना चाहता है, वही समाज अपने जीवन को खुशहाल बनाने के लिए, अपने श्रम के दाम को बढ़ा कर खुशहाल रहना चाहता है ।

साथियों, यहाँ ये समझने की बात है कि दोनों वर्ग मिलकर ही समाज चलाते है, पूँजीवादी विचारधारा, कहती है कि देश को पूँजीपति वर्ग ही चलायेगा, समाजवादी समाज कहता है कि पूँजीपति वर्ग की जरूरत ही नहीं है । समाज ही देश चलायेगा, खुद कमायेगे, सब मिलकर खायेगे । पूंजीवादी समाज कहता है कि जो हमारे पास काम करेंगे, उसको हम वेतन देगे, बाकी जो हम धन कमायेगे, वो हमारा है ।

वर्गीय समझ को समझने के लिए इतने उदाहरण काफ़ी है, जिसमें ये साफ हो जाता है कि समाज में दो वर्ग है, दो विचारधारा है, दो तरीके की व्यवस्थाऐ है । सब कुछ दो वर्ग में बटा है ।

आज हमने इतना समझ लिया कि ये पूरी दुनिया, दो वर्गीय समाज है । दोनों वर्ग अपने अपने हितों को कायम रखने के लिये, दूसरे को कमजोर करने, और अपने वश में रखने की अनगिनत प्रयास सदियों से करते आये हैं, आगे भी होगें । इसलिए यह सुनिश्चित है कि वर्ग संघर्ष कभी खत्म नही होगा, कमजोर हो सकता है ।

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