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राजनीति भाग – 04, पूँजीवाद की नई आर्थिक नीतियाँ, New Economic Policy Of Capitalism

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इन नई आर्थिक नीतियों का इजात अमेरिका ने किया, जिसको उन्हौने पूरी दुनिया पर लागू करने की योजना बनाई, जिसमे उनके तीन लक्ष्य थे, एक था उनके देश में जो बड़ी बड़ी कंपनियां है उनके पास बड़ी पूंजी एकत्रित हो गई थी, जिसके लिए बाजार चाहिए था, ताकि उसको लगाकर और मुनाफा कमाया जा सके । दूसरा पूँजीवादी व्यवस्था से दुनिया के देशों को इस तरह फसाना है ताकि उनको आर्थिक रूप से केवल पूंजीपतियो पर ही निर्भर हो जाए ताकि समाजवादी व्यवस्था की तरफ जाने के लिए सोच भी न पाये, उनकी नीतियों को पलटने की किसी भी सरकार में हिम्मत भी न हो । दुनियां के सभी सम्पति और संसाधनों पर पूंजीपतियो का कब्जा हो जाए । अमेरिका ने नेतृत्व में पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था की राजसत्ता के यह असल लक्ष्य है । बाकी दूसरे देशों का विकास और उनके हित, ये एक भाववादी और आदर्शवादी एजेंडा है । जिसके पीछे सोची समझी राजनैतिक लक्ष्य है । इसमे एक बात और समझनी है कि जो पूंजी विदेशी कंपनियां लेकर आयेगी, वो हमारे देश में नये नये कारखाने लगायेगी, फिर यहॉ से एक्सपोर्ट करेगी, अभी ऐसा बहुत कम है, अब सरकार की कंपनियों और संसाधनों को ओने पोने दाम में खरीद कर उस पर कब्जा करना है और फिर उससे मुनाफा कमाना है, अब ये है विदेशी कंपनियों का निवेश, हमारी नरेंद्र मोदी जी की सरकार सब कुछ बेचने का काम कर रही हैं, बहुत सारी कंपनी हमारी सरकारे बेच चुकी है ।
इसी लक्ष्य को पाने के लिए ये नई आर्थिक नीतियाँ लाई गई, इससे तो स्पष्ट हो गया होगा कि अब क्या क्या हमारे देश मे होने वाला है ।

अब हम आर्थिक नीतियों के बारे में समझते हैं ।

इन आर्थिक नीतियों के तीन मुख्य आधार थे, जिसमे एक भूमंडलीयकरण, दूसरा उदारीकरण, तीसरा निजीकरण, ये तीन मुख्य आधार है । अब इनको अलग अलग समझते हैं ।

भूमंडलीयकरण

इसका मतलब था कि पूरी दुनिया एक बाजार होगी, कोई भी देश, किसी दूसरे देश को व्यापार करने से नहीं रोक सकता, किसी भी देश में वह अपना पैसा लगा सकता है और कभी भी उसको, किसी दूसरे देश की कंपनियो को बेच सकता है, सरकार का कोई हस्ताक्षेप नहीं होगा । पूरी दुनिया में पूंजी के लगाने, हटाने पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा, दुनियां की कंपनियों के लिए सभी दरवाजे खोलने है । इससे पूरे दुनियां में पैसे लगाकर मुनाफा बनाने का रास्ता खुल गया ।

उदारीकरण

इसका मतलब है कि हर देश को अपने देश की कंपनियों को बचाने के लिए जो टैरिफ लगाते हैं, जो टेक्स लगाते हैं, उनको हटाना है, अपने देश के उध्धोग को भी बाजार पर छोड़ना है । किसी भी सेक्टर को नहीं छोड़ना है, इसके साथ ही जो सब्सिटी सरकारे अपने देश के किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, देश के नागरिको को देती है, उनको भी हटाना है । किसी भी वस्तु पर कोई सब्सिटी नहीं रहनी है, तभी तो विदेशी कंपनियां उनको खरीद पायैगी ।
इसके साथ में कानूनो को भी बदलना है जो इस प्रक्रिया को करने में बाधक बन रहे होंगे । जैसे श्रम कानून, पर्यावरण प्रदूषण कानून, टेक्स के कानून, वो सभी कानून हटाये जायेगे, जो भी किसी भी तरह का संरक्षण करते हो । इसके साथ ही सरकार सभी तरह का सहयोग करेगी, परमीशन और जॉच के दायरे बिल्कुल न्यूनतम किये जाएंगे । इस प्रकार के काम उदारीकरण में आयेंगे ।

निजीकरण

यह सबसे महत्वपूर्ण है और इसको बहुत ही अच्छी तरह से समझना है कि सरकार अपने सभी सरकारी संसाधनों और सर्विस को पूंजीपतियो को बेचेगी, पूंजीपतियो के हवाले करेगी । कुछ को लीज पर देगी, मगर सरकार को कही भी अपना कोई भी इन्वेसमेंट नहीं करना है, सब कुछ निजि देशी विदेशी पूंजीपतियो को देना है, इसमे सरकार कोई भी काम नहीं है, सरकार का केवल सेना, पुलिस और वित्त मंत्रालय है, बाकी सरकार को खुद कुछ नहीं करना है, सब कुछ पूँजीपतियो को बेचना है, पूँजीपति उसको चलायेगे और मुनाफा कमायेगे, इन सभी वस्तुओं और सेवाओ के भाव बाजार पर छोड़ना है, कौन सी वस्तु पूँजीपति किस रेट से बेचेगा, इसमे सरकार का कोई हस्ताक्षेप नहीं होगा, सब कुछ पूँजीपति और बाजार तय करेगा ।

ये है इन नई आर्थिक नीतियों की बुनियाद, ये मुख्य योजना है, बाकी नियम सब इसी के आस पास ही घुमते है । इसके समझने के बाद आप समझ गए होंगे कि आगे क्या क्या होने वाला है ।

इसमे एक और सबसे महत्वपूर्ण बात है कि ये नीतियाँ श्रम कानून खत्म करने और ट्रेड यूनियन को पूरी तरह से प्रतिबंधित करती है, मजदूर कर्मचारियों के काम के घंटे से लेकर नौकरी लगाने भगाने तक सब कुछ पूँजीपतियो पर छोड़ते है, वेतन सहित सबकुछ बाजार पर छोड़ने को कहते हैं । नौकरी की सुरक्षा बिल्कुल खत्म करने, कभी भी लगाओ और कभी भी भगाओ की वकालत करते हैं । पर्यावरण कानूनो को भी ढ़ीला करवाते है । प्राकृतिक संसाधनों पर सरकार की जगह पूंजीपति का कब्जा करवाते है ।

हमारे देश में ये आर्थिक नीतियाँ 1990-91 में लाई गई थी, तब से हमारा देश इस दिशा की तरफ़ चल दिया था, आज लगभग 70 प्रतिशत तक ये नीतियाँ लागू हो चुकी है और हमारे देश की जनता को कुछ समझ नहीं आया, वो अभी भी हिन्दू मुसलमान, दंगे फ़साद, मंदिर मस्जिद, हिन्दुस्तान पाकिस्तान, गॉधी जिन्ना की बहस में मस्त है । यहॉ पूरे देश को बेचने की मुहिम युद्ध स्तर पर चल रही है ।

100 प्रतिशत FDI इसी लिए खोली गई थी, ताकि विदेशी कंपनियां हमारे देश के संसाधनों की सीधी खरीदी कर सके । अभी तक हमारे देश में ये कुछ मुख्य काम हमारे देश की सरकारे कर चुकी है ।
जिसमें श्रम कानून लगभग खत्म कर दिये गए हैं, परमानेंट नौकरी खत्म कर दी गई है, पूरे देश में काम के घंटे 12 करने की मुहिम चल रही है, गुजरात जैसे राज्य में लगभग 70 प्रतिशत कारखानो में 12 घंटे काम कराया जा रहा है । ओवर टाइम दुगना मिलना लगभग बंद हो गया है । ट्रेड यूनियने बनना बंद कर रहे है कुछ राज्यों में तो ट्रेड यूनियन रजिस्टार ही हटा दिये गए हैं, खूब खून चूस काम होने लगा है ।

निजीकरण की मुहिम में बैकिंग सेक्टर में निजी पूंजीपति आ गए, सरकारी बैके भी बेचने की तैयारी हो गई है । इंश्योरेंस कंपनियों में भी बड़ी संख्या में विदेशी कंपनी आ गई है, भारतीय जीवन बीमा निगम और सरकारी जनरल इंश्योरेंस को बेचने की तैयारी हो गई है । देश की नवरत्न कंपनियों में बहुत सारी बड़ी कंपनियां बिक चुकी है और लगभग 240 कंपनियों को बेचने की सरकार ने अनुमति दे दी है । बाकी सभी ऑयल रिफाइनरी, कोर्परेशन, एन टी पी सी, बी एच ई एल, जैसे सभी संस्थानों के कुछ शेयर बेचे जा चुके है, वाकी सब बेचने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है । रेलवे को बेचना शुरू कर दिया गया है, बड़ा काम रेलवे स्टेशन बेचना शुरू कर दिए हैं । हमारे देश की हथियार बनाने वाली कंपनियों के भी कुछ शेयर बेचे जा चुके हैं, बाकी बेचने का काम तेजी से चल रहा है, सरकारी एअर लाइन्स भी बेचने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, दवाइयों की ड्रग्स बनाने वाली सरकारी कंपनियों को बेच दिया गया है अभी हम चायना के मार्केट पर निर्भर हैं । जिस दिन चायना ने ये सप्लाई बंद की सारी दवा कंपनी बंद हो जाएगी । शिक्षा के क्षेत्र में गॉव से लेकर बड़े बड़े युनिवर्सिटी प्राइवेट हाथों में दे दी गई है, बड़ी युनिवर्सिटी को बेचने की तैयारी तेजी से चल रही है, इसी प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा प्रतिशत नीजि हाथों में चला गया है, सरकार हर वर्ष स्वास्थ्य का बजट कम कर रही है, और प्राइवेट कंपनियों को बढ़ावा दे रही है, इसके साथ में इसमे इंश्योरेंस कंपनियों को भी इसमे ला दिया है, जिससे सुविधाएं और महंगी हो गई है, कोयला लोहा की खदाने और कंपनियों को सरकार नीजि देशी विदेशी कंपनियों को बेचे जा रही है । ट्रांसपोर्ट सेक्टर का सारा काम विदेशी कंपनियों को दिया जा रहा है, ट्रांसपोर्ट आर टी ओ सम्बंधी काम को भी विदेशी कंपनियों को दिया जा रहा है, हाइवे, रोड पुल निर्माण, बॉध इन सब निर्माण कामों में सौ फीसदी देशी और विदेशी कंपनियों ने कब्जा कर लिया है, सरकारी विभाग बंद कर दिए गए हैं । दूरसंचार विभाग पूरी तरह से रिलाइंस, एअर टेल, आइडिया जैसी कंपनियों ने कब्जा कर लिया, भारतीय संचार निगम लि को पूरी तरह से जानबूझकर घाटे में करके जल्दी बेच दिया जायेगा । इसलिए उसका 4जी भी नहीं आने दे रहे हैं, यह सरकार खुद कर रही है । ये हमारी देश की सुरक्षा के लिए बड़ा क्षेत्र है ।

किसानों के क्षेत्र में

किसानों की दी जाने वाली सब्सिटी लगभग खत्म कर दी गई है, खाद बीज कीटनाशक सब कुछ देशी विदेशी कंपनियों को दे दिया गया है, किसानों की फसलों की खरीददारी में भी विदेशी कंपनियां आ गई है, न्यूनतम समर्थन मूल्य सही तरीके से घोषित नहीं है, जो घोषित है वह लागू नही होता, विदेशी कंपनियां लूट मचा रखी है, डीजल पेट्रोल के दामो में एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई, जी एस टी के दायरे में नहीं रखा, इससे डीजल पेट्रोल सस्ता हो जाता । ये कुछ काम है जो मैने लिखे जो इन आर्थिक नीतियों को लागू करने का ये नतीजा है । इसके नकारात्मक परिणामो पर चर्चा अगले भाग में करेगे ।

नरेंद्र मोदी जी इन्हीं नीतियों पर दौड़ लगा रहे है तो आप अब समझने लगे होगे कि आगे और क्या क्या होने वाला है, मोटा मोटा बात करेंगे तो सभी सरकारी कंपनी बिकेगी, रेलवे बैक बीमा दूरसंचार कंपनी, सहित सभी नवरत्न कंपनी बिकेगी, श्रम कानून खत्म होगे, नौजवानो पर शोषण बढ़ेगा, बेरोजगारी बढ़ेगी, किसानों का संकट बढ़ेगा, शिक्षा स्वास्थ्य बहुत ही मंहगे होगे । फुटकर व्यापार कमजोर होगा, बड़ी बड़ी कंपनियों का बाजार पर कब्जा होगा । दंगे फ़साद की राजनीति बढ़ेगी, हिन्दू मुसलमान, मंदिर मस्जिद, ये सब और ज्यादा होगे, भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा, ये कुछ सिग्नल है । ये इस पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था की इन नई आर्थिक नीतियों का परिणाम है, इसके कारण है । इसमे किसी भगवान देवी देवता राक्षस, अल्लाह, ईसा मसीह, गुरु जी, किसी का कोई हाथ नहीं है, न ही ये किसी की किस्मत नसीब का कारण है, ये केवल सरकार की इन आर्थिक नीतियों के परिणाम है ।

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