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राजनीति भाग -02, पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था का इतिहास History Of Capitalism

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पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था बहुत ही पुरानी है, इसमे कबीले की व्यवस्था के बाद, गुलामो की व्यवस्था के साथ राजशाही और राजशाही के बाद पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था आई थी जो आज भी चल रही है, पहले, सम्पति और संसाधनों का मालिक राजा होता था, जैसे ही इंगलैड में औद्योगिक विकास हुआ, जिसके बाद दुनियां भर में टेक्नोलजी पैदा हुई, और धीरे धीरे राजाशाही खत्म हुई, और पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था, पूँजीवाद आया, इसमे केवल इतना बदलाव हुआ कि सम्पति और संसाधनों पर अब कब्जा राजाओ की जगह पूँजीपतियो का हो गया, इन्हौने अपनी नई राजनैतिक व्यवस्था बनाई जो आज पूरी दुनिया के बहुत बड़े हिस्से में है । इसके साथ ही समाजवादी व्यवस्था भी पैदा हुई और रूस की क्रांति के बाद पूरी दुनिया में तेजी से फैली और दोनों व्यवस्थाओ में बहुत तगड़े टकराव हुए, जिसका परिणाम प्रथम विश्व युद्ध, दूसरा विश्व युद्ध और शीत युद्ध रहा, और 1990 में सोवियत संघ के विखंडन के बाद, अमेरिका के नेतृत्व में एक नये पूँजीवादी व्यवस्था का उदय हुआ, जिसको फ्री मार्केट इकनोमी व्यवस्था कहा जा रहा है जो योजना बद्ध तरीके से पूरी दुनिया पर थोपी जा रही है, हम अब अमेरिका के इस पूँजीवादी राजनैतिक मॉडल को समझेगे । यह व्यवस्था क्या है ।

अमेरिका पर फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन का राज था, धीरे धीरे ब्रिटेन ने अपनी ताकत से फ्रांस और स्पेन के जगह पर कब्जा कर लिया, बाद में पूरे ब्रिटेन का राज था । बहुत सारे टेक्स लगाये गए, कई तरह के प्रतिबंध लगाये गए, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ता गया और फिर ब्रिटेन को हटाने का संघर्ष शुरू हो गया, उस समय में फ्रांस ने इन लोगों की मदद की क्योंकि फ्रांस ब्रिटेन में पहले से बदला लेना चाहता था ।
आखिरी में 1776 में अमेरिका आजाद हुआ और 4 जुलाई 1789 में संविधान लागू हुआ, ये दुनिया का पहली पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था थी, जो शुरू हुई, यहॉ पर एक बात और समझना है कि उस समय में वोट डालने का अधिकार केवल उन्हीं लोगों को था जिनके पास सम्पति थी, महिलाओं को भी वोट डालने का अधिकार नहीं था, इस प्रकार से लगभग 70 प्रतिशत आबादी को वोट डालने का अधिकार नहीं था ।
इस पूँजीवादी व्यवस्था ने एक ऐसे आर्थिक नीतियाँ लाई जिससे बड़ी संख्या में निजि पूंजीपति वर्ग पैदा हुआ, बहुत बड़ी बड़ी नई कंपनी बनी, यही से एक व्यक्तिगत सम्पति बनाने की होड़ पैदा हुई, क्योंकि सरकार में यही लोग थे, तो इन्हौने वह सब नियम बनाये जिससे निजि पूँजीपति को फायदा होना सुनिश्चित हो । इस व्यवस्था में 1970 के बाद अमेरिका ने फ्री मार्केट इकोनमी को अपनाया जिसमें सरकार का हस्ताक्षेप लगभग खत्म कर दिया गया, सब कुछ कंपनियों पर छोड़ दिया गया । इस व्यवस्था ने बड़े बड़े पूँजीपति घराने पैदा किये, जिनके पास लाखो हजार करोड़ की सम्पति एकत्रित हो गई । यह खुद एक साम्राज्य कायम हो गया । अब इनको पूंजी को बढ़ाने के लिए बाजार चाहिए, इसके बिना ये बड़ नहीं सकती, जिसके कारण ये नई आर्थिक नीतियाँ लाई गई निजीकरण उदारीकरण भूमंडलीयकरण का नारा दिया गया । आगे हमको इन्ही को समझना है ।

इसी समय में कार्ल मार्क्स ने मजदूर वर्ग के लिए थ्योरी लिखी, जिसमे उन्हौने मजदूर वर्ग की राजसत्ता कायम करने का सूत्र बताया, क्योंकि पूँजीवादी व्यवस्था में बेताहासा शोषण दमन अत्याचार था, जिससे बहुत बड़ा आक्रोश पूरी दुनिया में था, इस समय में मार्क्स की थ्योरी से लेनिन ने 1917 में क्रांति करके लागू किया, रूस में पहली समाजवादी विचारधारा की राजनैतिक व्यवस्था कायम हुई, इस समय बहुत सारे देशों ने समाजवादी व्यवस्था को अपनाया, इस समय में दुनियां के पूंजीपतियो और पूँजीवादी व्यवस्था को लगा कि अब पूरे दुनियां में समाजवादी व्यवस्था आ जायेगी, इसको रोकने के लिए अमेरिका के नेतृत्व में एक गुरुप बना, जिसने समाजवादी रूस को घेरना शुरू किया और पूंजीवाद को सही बताया, इस समय में एक बात और समझनी है कि रूस की समाजवादी व्यवस्था के दबाव में पूरी दुनिया में, मजदूरों के लिए कानून बनाये, उनको बहुत सारे अधिकार दिए, बेलफेयर स्टेट कहा, ट्रेड यूनियन संगठन बने, परमानेन्ट नौकरी, आठ घंटे का काम, बहुत सारी सुविधाएं मिली । इसी कारण से कुछ राहत पुरे दुनियां के मेहनत कश वर्ग को मिली, हमारे देश में भी 1926 में पहला ट्रेड यूनियन अधिनियम बना ।
इस दोनों विचारधारा का टकराव बहुत समय तक चला । अंत में पूँजीवादी खेमा, 1990 में सोवियत संघ का विखंडन करने में सफल हुआ । इसके बाद अमेरिका के नेतृत्व में एक नये पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था का जन्म हुआ, जिसमे उन्हौने बहुत सारे सुधार करके, नई आर्थिक नीतियाँ लाई गई, जिसको विश्व व्यापार संगठन और विश्व बैंक के माध्यम से थोपा गया । हमारे देश ने भी 1990 में इस नितियो को मान लिया गया, जब कांग्रेस की सरकार थी ।
यह इतिहास है पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था का, हमारे देश के परपेक्ष में समझना है कि आज इस पूँजीवादी मॉडल को लागू करने की होड़ लगी हुई है, मोदी जी इसको बहुत जल्दी पूरी तरह से लागू करना चाहते हैं ।

साथियों, हमको ये बहुत अच्छी तरह से समझना है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों पूँजीवादी पार्टी है और पूँजीवाद को लागू रखना चाहती है, आर्थिक नीतियाँ दोनों की वही है जो अमेरिका सहित पूँजीवादी व्यवस्था बनाती है, उन्हीं को लागू करते हैं जो विपक्ष में रहता है वो विरोध का दिखावा करता है ताकि देश में केवल भाजपा कांग्रेस की दो धुर्वीय राजनीति बनी रहे ।
जबकि असल में दो वर्ग पूंजीवाद और समाजवाद है । लेफ्ट और राइट है, वामपंथी और दक्षिण पंथी है । यही दो वर्गीय राजनीति है । इसको समझना है ।
ये पूँजीवादी राजनैतिक व्यवस्था का इतिहास है, इस तरह से ये व्यवस्था आई, अब हम अगले भाग में इसके स्टैकचर को समझेगे, कि ये कैसे चलती है, कौन से अंग कैसे काम करते है ।

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