मोदी जी, झूठ क्यों बोला, जबाब दो

नरेंद्र मोदी जी ने लोकसभा चुनाव के पहले, देश के नौजवान को वादा किया था कि हर वर्ष दो करोड़ रोजगार पैदा करेगे, जिससे देश के नौजवानो ने उन पर उम्मीद लगाकर बढ़ चढ़ कर समर्थन किया, बाद में अमित शाह जी ने चुनावी जुमला कह दिया ।

पिछले तीन सालो में नरेन्द्र मोदी जी की सरकार ने जो फैसले किए, उससे रोजगार खत्म हुए, शोषण बढ़ा, नौकरी असुरक्षित हुई, और बेताहासा बेरोजगारी बढ़ी । ये उनका वादा जुमला ही निकला ।
अब इस राजनैतिक सच्चाई को समझते हैं, भाजपा और कांग्रेस, दोनों हमारे देश की पूँजीवादी विचारधारा की पार्टी है, इसमें कोई शक नहीं है, भाजपा ने चुनाव जीतने के बाद उन्हीं, आर्थिक नीतियों को बहुत ही तेजी से आगे बढ़ाया, जो कांग्रेस चला रही थी, नीतियों में कोई परिवर्तन नही हुआ, इसलिए व्यवस्था में कोई परिवर्तन नही हुआ, यह राजनैतिक तौर से समझना जरूरी है कि आर्थिक परिवर्तन, आर्थिक नीतियों को बदले बिना नही हो सकते ।

इसका दूसरा पहलू समझे, पूँजीपतियो ने अपार धन लगाकर नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया, उनको क्या चाहिए था, सस्ता मेन पावर, इसके बेरोजगारो की फौज खड़ी कर दी गई, दूसरा मजदूर, कर्मचारी गुलाम बनके काम करे, इसके लिए श्रम कानून बदल दिए, 44 कानूनो को समाप्त करके, केवल चार सहिता बनेगी, मुह खोला नौकरी से हटाया जाएगा, 10 से 12 घंटे गुलामो की तरह काम करो, आज स्टाफ तो कर ही रहा है, ठेका मजदूर कर ही रहे है, केवल 5 प्रतिशत परमानेन्ट नौकरी वाले लोग बचे है, 95 प्रतिशत लोगों को गुलामी की बेड़ियां लगा दी है, ये 5 प्रतिशत लोगों को गुलामी में धकेलने की तैयारी हो गई है ।
इसी समय में सब पूँजीपतियो की संपत्ति बेताहासा बढ़ रही है, इसी के लिए तो, हमारे देश के पूँजीपति, नरेंद्र मोदी जी को लेकर आये थे, जिसके लिए लेकर आये थे, वो मोदी जी से वही करवा रहे है । मोदी जी भी वही कर रहे है ।

रोजगार बढ़ाने के लिए सरकार को खुद बड़ा इनवेस्ट सामाजिक क्षेत्र में करना पढ़ेगा, और न्यूनतम मजदूरी कम से कम 20000 रुपये महीना करना होगा, नौकरी परमानेन्ट देनी होगी, शिक्षा और स्वास्थ्य में बजट बढ़ाना होगा, जो भी सामान हम आयात कर रहे है, उसको सरकार को अपने देश में ही पैदा करना होगा, सभी सार्वजनिक कंपनियों को बेचना नही है, उनको मजबूत करना होगा, तभी रोजगार पैदा होगें ।

मगर सच यह है कि ये काम भाजपा की नरेंद्र मोदी जी की सरकार नही कर सकती, और कांग्रेस भी नहीं कर सकती, क्योंकि ये पूँजीवादी विचारधारा की पार्टियॉ है, इस प्रकार की नीतियों वामपंथी विचारधारा के दल ही बना सकते है, जिनको देश की जनता का, उतना राजनैतिक समर्थन वर्तमान में प्राप्त नहीं है ।
इसलिए ये बेरोजगारी, भुखमरी, गुलामी थोपने वाली नीतियाँ अभी जारी रहेगी ।

इनको रोकने के लिए विरोध कर सकते है, उसके लिए खासकर नौजवान पीढ़ी तैयार हो, और वामपंथी विचारधारा के दलो के आह्वान पर लाखों की संख्या में सड़को पर उतरा जाए और कोई रास्ता अभी दिखाई नहीं दे रहा है । अभी संघर्ष के अलावा कोई विकल्प नहीं है, आगे राजनैतिक व्यवस्था बदलने से ही, ये सब संकट सही होगा, वो राजनैतिक विचारधारा वामपंथी राजनैतिक मोर्चा है ।

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