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महिलाओं की स्थिति पर, वामपंथ की समझ

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Ashish

महिलाओं पर सदियों से तरह तरह से अत्याचार हुए, किसी भी सदी में, कोई भी आपदा आई, कोई भी सामाजिक उत्पीड़न हुआ, उसकी शुरुआत महिलाओं से शुरू हुई, महिलाए भी इस वर्गीय चक्र में सबसे ज्यादा घिसी गई, आज इसी समझ पर एक नजर डालते है ।

जैसा कि हमने देखा कि पूरा समाज दो वर्गोय है, जिसमें एक पूँजीवादी विचारधारा की व्यवस्था और दूसरी समाजवादी विचारधारा की व्यवस्था, ये पूरी दुनिया का वर्गीय चरित्र है, अभी हम भारत देश की बात करेगे । इस वर्गीय व्यवस्था का असर दिखाता है कि सामाजिक व्यवस्थाऐ किस प्रकार से खुले रूप से भिन्न भिन्न है । इसमें एक समझ और जोड़ देते है कि समाज में दो वर्गीय विचारधारा है, जिसमें एक को भाववादी और दूसरी को भौतिकवादी, इन विचारों से ही पूरी समाज की संरचना है, इस पर चर्चा अलग से करेगे ।
अब हम पूँजीवादी विचारधारा व्यवस्था और भाववादी विचारों में महिलाओं की स्थिति को समझते है ।
01. इस व्यवस्था महिलाओं पर बंदिशे बहुत सारी है, उनके लिए नियम बहुत सारे है, ये हर धर्मो में महिलाओं की स्थिति लगभग एक जैसी है, ये नियम सदियों से लगे है, जिसमें कुछ को धर्म के नाम पर थोपा गया, कुछ को सम्मान और इज्जत के नाम पर, जातिय व्यवस्था ने महिलाओं के शोषण, अत्याचार की बड़ी कड़ी जोड़ दी, इसी प्रकार छूआछूत, बराबरी, दहेज प्रथा, शिक्षा में बराबरी, सेक्चुअल शोषण, पूर्व में सती प्रथा, तलाक प्रथा, इस्लाम का तीन तलाक, कुछ लोगों ने बच्चे पैदा करने की मशीन समझा, तो किसी ने पर्दे के अंदर रखने का सामान, किसी ने उसको अपनी इज्जत बना दिया, पति भगवान, महिला सामान, वो कुछ भी करें, पीटे, करोड़े, सड़क पर पीटे, भूखा रखे, पति परमेश्वर है, कुछ भी हो, महिला उस पुरुष के अत्याचार की आत्मरक्षा भी नहीं कर सकती, यदि कोई उसको बचाने पहुंच गया, तो ये समाज के लोग, उसका पति उसको तुरंत बदचलन घोषित कर देते, पति और बच्चों की रक्षा के लिए भूखे रहना, मंदिरो मस्जिदो चर्चो में जाकर, भगवान, अल्लाह, ईसू के सामने परिवार के लिए गिड़ गिड़ाना, उनकी सलामती की दुआ मॉगना, जाति और धर्म की बेड़ियो ने ऐसा जकड़ रखा है कि महिलाओं की अपने हिसाब से जीने की आजादी ही खत्म कर दी, हर धर्म में महिलाओं के लिए स्पेशल नियम है, जिसमें तरह तरह के प्रतिबंध है, बड़ी संख्या में जिसको महिलाओं ने स्वीकार कर लिया और अपने जीवन का हिस्सा बना लिया ।
02. शिक्षा में सदियों से महिलाओं को पीछे रखा गया, मगर आज कुछ स्तर बदल रहा है, और तेजी से बदलने की जरुरत है, मनुस्मृति सोच के लोगों में अभी भी वही भरी हुई है, वही हाल इस्लाम मानने वालों का है ।
03. दहेज प्रथा इस समाज का सबसे बड़ा कलंक है, जिसमें समाज पूरी तरह से लिप्त हो गया है, आज की शान शौकत और दिखावे ने, इसको और बड़ा दिया है, इसको समाज के धनाड्ड लोग नहीं बदलने दे रहे है । इसकी शिकार बच्चियो की दर्दनाक पीढ़ा की अनगिनत कहानियॉ है, अनगिनत दर्द दफन हो गए हैं । पूँजीवादी समाज में इसका कोई वह दिखाई नहीं दे रहा है, न कोई इसकी पहल करने को तैयार है ।
04. अंधविश्वास, जिसकी सबसे ज्यादा शिकार, महिलाए होती है, इसमें हर धर्म में, इन दिमागी बेड़ियां डाली जाती है, दिमाग को शून्य करके, शारीरिक शोषण भी किया जाता है । इसका कोई इलाज इस विचारधारा के अंदर नही है, और ये विचारधारा इसको ऐसे ही रखना चाहती है ।
05. धर्म के आधार पर पहनावा, महिलाओं पर पहचान के रूप में कुछ जेबर पहनना, कुछ अलग पहनावा पहनना, महिलाओं की पहचान है, जिसको और मजबूत किया जा रहा है, दूसरी तरफ जबरजस्ती मनवाया जा रहा है । शादियो में जाति, धर्म का प्रतिबंध सुनिश्चित है, जिसके बारे में न जाने कितनी हत्याए हो चुकी हैं ।

इतना काफी है, अब हम समाजवादी विचारधारा की व्यवस्था में, हम महिलाओं की स्थिति को देखते हैं :-
01. समाजवादी वैज्ञानिक विचारधारा के समाज में, जाति और धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नही होता, इसलिए जाति धर्म के नाम पर लगाए गए सारे प्रतिबंध खत्म हो जाते है ।
02. दहेज प्रथा नाम का कोई शब्द भी नहीं है, शादियो 501 रुपये में हो जाती है, कोई दिखावा नही किया जाता ।
03. महिलाओं के साथ समानता का भाव है, ऐसा कोई भी काम नहीं है, जिसको ये कहा जाए कि ये सिर्फ महिला का है, सब में, सब कुछ बराबर है ।
04. वैज्ञानिक विचारधारा है, इसलिए, पढाई लिखाई के साथ किसी भी स्तर पर लड़का, लड़की में कोई भेदभाव नही है ।
इसलिए, महिलाओं की स्थिति में समाजवादी विचारधारा की समाज व्यवस्था से सही कोई व्यवस्था नहीं है ।
यह अंतर क्यों है, क्योंकि व्यवस्था विचारधारा से ही बनती है, विचारधारा से ही बदलाव आते है, इसलिए महिलाओं की इस दुर्दशा का कारण, नसीब, किस्मत, या पुराने जन्मो का पाप नही है, इसका कारण पूँजीवादी विचारधारा समाज व्यवस्था है, जिसको उखाड़ फैकने की जरूरत है, तभी हम दुनिया में महाशक्ति बनने की तरफ बढ़ पायेगे, ये अंधविश्वासी व्यवस्था, महाशक्ति कभी नहीं हो सकती है । इस व्यवस्था में महिलाओं को बराबरी के अधिकार कभी नहीं मिल सकते ।

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