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भोपाल में आशा ऊषाओ ने, सभा के बाद रैली निकालकर सरकार को सौपा ग्यापन

Admin

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दिनांक : 20 फरवरी 2019
वचनपत्र का वचन पूरा करने की मांग
शाहजहानी पार्क में सभा के बाद रैली निकाल कर आशाओं ने सौंपा ज्ञापन
भोपाल/ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग की सभी योजनाओं और अभियानों को निचले स्तर पर लागू करने के महत्वपूर्ण काम में लगी आशा-ऊषा-सहयोगियों को कर्मचारी का दर्जा एवं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त वेतन दिये जाने सहित मांगों को लेकर आशा-ऊषा-आशा सहयोगी एकता यूनियन (सीटू)के आह्वान पर आशा-ऊषा-सहयोगियों ने आज 20 फरवरी 2019 को भोपाल के शाहजहांनी पार्क में सभा के बाद रैली निकाल कर प्रदर्शन करते हुये एवं प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यूनियन ने केन्द्रीय योजना-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत आशा-ऊषा-सहयोगियों के शोषण के लिये केन्द्र एवं राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये शोषण से राहत दिलाने के लिये कदम उठाने की मांग की।
शाहजहानी पार्क मसभा को मुख्यवक्ता सीटू राज्य अध्यक्ष रामविलास गोस्वामी, महासचिव प्रमोद प्रधान, सीटू राज्य सचिव शैलेन्द्र ठाकुर, पी एन वर्मा, आशा यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ए टी पदमनाभन,महासचिव ममता राठौर, सहायक महासचिव पूजा कनौजिया, उपाध्यक्ष कांता अहीर, बबीता चौबे, मीरा काशिया, किरण विशवकर्मा, रंजना द्विवेदी, कोषाध्यक्ष अन्नपूर्णा सेन सहित डेढ दर्जन वक्ताओं ने सम्बोधित किया। सभा को सम्बोधित करते हुये श्री प्रमोद प्रधान ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में सबसे अधिक काम आशायें करती है। अधिकांश राज्य सरकारें आशाओं को अपनी ओर से अतिरिक्त मानदेय दे रही है, लेकिन प्रदेश सरकार आशाओं को अपनी ओर से कुछ भी नही दे रही है। उन्होंने राज्य सरकार से शासकीय योजना में, शासन के निर्देश पर, शासकीय अधिकारियों की देखरेख में काम करने वाले आशा-ऊषा-सहयोगियों का शासकीय कर्मचारी की पात्रता का समर्थन करते हुये आशा को शासकीय कर्मचारी का दर्जा एवं तब तक न्यूनतम वेतन दिये जाने की मांग की। उन्होंने केन्द्र और राज्य सरकार पर आशाओं का अमानवीय शोषण करने का आरोप लगाते हुये अन्य राज्यों की तरह प्रदेश में भी राज्य सरकार की ओर से वेतन के लिये संघर्ष को तेज करने का आह्वान किया। यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ए टी पदमनाभन ने नवनिर्वाचित राज्य सरकार को अपना वचनपत्र याद दिलाते हुये कहा कि कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में आशा-ऊषा-सहयोगियों को नियमित करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक राज्य सरकार आशाओं का नाम नही लिया है। उन्हों ने कहा कि नियमितीकरण तो होना ही है लेकिन अन्य राज्यों की तरह प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त वेतन के लिये इंतजार नही कर सकते है क्योंकि आशा-ऊषा-सहयायिकायें लम्बे समय से शोषण सह रही है। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से अविलम्ब वेतन दिये जाने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि सरकार आशाओं को वेतन देनेे के बजाय प्रोत्सहन राशि के नाम पर अलग अलग काम के लिये अलग अलग राशि का भुगतान की व्यवस्था की है। लेकिन उन्हें उनके द्वारा किये गये काम का भी राशि पूरा नही कमल रही है। तीन तीन-चार चार महीने विलम्ब में आशाओं का भुगतान करते है। बकाया राशि का भुगतान नही करते। इस तरह आशाओं के लिये काम कराने की योजना विभाग के पास है लेकिन वेतन भुगतान की योजना नही है। पिक्स वेतन की व्यवस्था किये बिना आशाओं का शोषण बंद नही हो सकते। कई राज्यों में मानदेय / वेतन दे रही है, लेकिन मध्य प्रदेश में सरकार अभी भी खामोश है।
सभा के बाद अपरान्ह 3.00 बजे शाहजहानी पार्क से रैली निकाली गयी जिसे नीलम पार्क के पास पुलिस ने रोका जहां प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया।

11 मार्च को होगी प्रदेश व्यापी हडताल
इस दौरान आन्दोलन स्थल पर सपन्न यूनियन की विस्तारि राज्य समिति बैठक ने नियमितीकरण , राज्य सरकार से अतिरिक्त वेतन एवं प्रोत्साहन राशि का पूरा एवं नियमित भुगतान की मांग को लेकर आगामी 11 मार्च 2019 को एक दिवसीय प्रदेशव्यापी हडताल का निर्णय लेते हुये सभी आशा-ऊषा-सहयोगियों से इसे सफल बनाने की अपील की।

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