भारत के छात्र आन्दोलन, का वर्गीय चेहरा

हमारे देश में छात्र आन्दोलन हमेशा मुखर रहा है, आजादी के आन्दोलन में छात्र आन्दोलन की प्रमुख भूमिका रही, इन्ही आन्दोलन ने नौजवानो को देश के लिए अपनी जान तक देने के लिए प्रेरित किया, आज देश में कई बड़े छात्र संगठन है, अभी हमने जे एन यू, बी एच यू, हैदराबाद यूनिवसिर्टी, के आन्दोलनो को देखा है ।

इन संगठनो में भी दो वर्गीय संगठन है, एक वामपंथी विचारधारा, दूसरे पूँजीवादी विचारधारा । यह समझना बहुत जरूरी है कि ये वर्गीय समाज है, इसमें वर्ग होना सुनिश्चित है। वामपंथी विचारधारा के छात्र संगठन, एस एफ आई ( स्टूडेंट फैडरेशन ऑफ इंडिया ) ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोशिएशन (ए आई एस ए ) है, इसी प्रकार से पूँजीवादी विचारधारा के छात्र संगठन, ए बी वी पी (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ),एन एस यू आई ( नेशनल स्टूडेंट युनियन ऑफ इंडिया ) हैं, और भी कुछ छोटे छोटे छात्र संगठन है, जिसमें कुछ दलित छात्र संगठन भी है, जो अलग अलग राजनैतिक विचारों का समर्थन करते है ।

अब मुद्दों पर आते हैं, कि ये संगठन क्या मुद्दे उठाते है, सभी छात्र संगठन शिक्षा का व्यावसायिक बंद करो, फीस कम करो, सबको शिक्षा दो, शिक्षा बजट बढ़ाओ, जैसी, कुछ मॉगे एक जैसी है, मगर कुछ अंदर जायेगे तो पायेगे कि छात्र संगठनो की मांगे वर्गीय चरित्र के हिसाब से अलग अलग है ।

जैसे एक पूँजीवादी विचारधारा के छात्र संगठन, सरकारो के खिलाफ, निजीकरण बंद करो का कभी कभार नारा देते है, मगर सरकारो पर दबाव नही बनाते, क्यों नहीं बनाते, क्योंकि उनके वर्गीय चरित्र की राजसत्ता के लिए निजीकरण करके पूँजीपतियो को मुनाफा कमाने के लिए देना, उनका राजनैतिक वर्गीय हित है, इसलिए वो उसके खिलाफ सिर्फ दिखावा करते है ।

दूसरा, शिक्षा मुफ्त करो, ये नारा भी अधिकतर पूँजीवादी छात्र संगठन, नही दे पाते, क्योंकि इसमें भी इनके वर्गीय हित में, शिक्षा को व्यवसाय बनाकर, उस पर मुनाफा कमाना, इनका वर्गीय हित है ।

तीसरा, सबको रोजगार दो, स्थाई नौकरी दो, अच्छा वेतन दो, ये मॉग तो पूँजीवादी विचारधारा के वर्गीय हित के विरुद्ध है, इसलिए ये नारे पूँजीवादी छात्र संगठन लगाते नही है, लगाते है तो सिर्फ छात्रों को बेबकूफ बनाने के लिए ।

चौथा, शिक्षा में क्या पढ़ाया जाना चाहिए, इसमें बहुत ही ज्यादा कन्फ्यूजन है, ये छात्र संगठन वैज्ञानिक विचारधारा, से तर्क समझ, पढ़ाई होनी चाहिए, इसकी मॉग भी नहीं करते, क्योंकि ये इनके वर्गीय हित के लिए खतरा है, और इनके हितों के विरुद्ध है । दूसरा इनके अंदर भी अलग अलग इतिहास है, कोई गॉधी को पढ़ाना चाहता है, कोई सावरकर को पढ़ाना चाहता है, मगर क्रांतिकारी विचारों के इतिहास को दोनों नही पढ़ना चाहते, सरदार भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद सुभाष चंद्र बोस लक्ष्मी सहगल भीमराव अंबेडकर , जैसे विचारको के आदर्श विचारों को नहीं पढ़ाना चाहते हैं, यहां तक की रानी लक्ष्मीबाई बहादुर शाह जफर जैसे सैकड़ों क्रांतिकारियों के इतिहास को भी नहीं पढ़ाना चाहते हैं ।

पॉचवॉ, अभी हमारे देश में पूंजीवादी विचारधारा के विचारक केवल महात्मा गांधी बच्चे हैं उनके अलावा अभी कोई नहीं है, इसीलिए आज भाजापा हो या कांग्रेस दोनों ने अपना आइकॉन महात्मा गांधी जी को बना रखा है यह इसलिए कर रहे हैं कि ये उनकी विचारधारा की मजबूरी है । क्योंकि वह सरदार भगत सिंह सुभाष चंद्र बोस चंद्रशेखर आजाद लक्ष्मी सहगल बाबा अंबेडकर को अपना आइकॉन नहीं बना सकते, क्योंकि इन महान क्रांतिकारियों का मत इस पूंजीवादी शोषण कारी व्यवस्था के खिलाफ था, इसीलिए इन क्रांतिकारियों ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया । इसलिए पूँजीवादी विचारधारा के छात्र संगठन, इंकलाब जिंदाबाद, के नारे नहीं लगाते । जिसका अर्थ होता है कि हम इस व्यवस्था को बदलना चाहते हैं ।

अब हम वामपंथी विचारधारा के छात्र संगठनों की चर्चा करते हैं :-
एक, इनका पहला नारा है कि सबको शिक्षा सबको काम, हर हाथ को काम दो काम का वाजिब दाम दो, इन दोनों नारों में विचारधारा का संपूर्ण मैसेज है, जो समाजवादी, समाज के वर्गीय चरित्र के हित में है ।

दूसरा, इन छात्र संगठनों का सबसे प्रमुख नारा, पूरे देश में उच्च शिक्षा तक शिक्षा मुक्त करो, सरकार के बजट में शिक्षा का बजट बढ़ाओ, यह भी समाजवादी समाज के वर्गीय चरित्र के हित में है ।

तीसरा, यह छात्र संगठन, शोषणकारी आर्थिक नीतियों का विरोध करते हैं, यह वैश्वीकरण निजीकरण भूमंडलीकरण की नीतियां बंद करो, रोजगार पैदा करने वाली आर्थिक नीतियां बनाओ, हर हाथ को काम दो काम का वाजिब दाम दो, बेरोजगार नौजवानों को स्थाई रोजगार दो, यह मांगे पूंजीवादी विचारधारा के छात्र संगठन नहीं उठाते, इन मॉगो को वामपंथी विचारधारा के छात्र संगठन उठाते हैं, क्योंकि यही समाजवादी समाज के वर्गीय हित में है ।

चौथा, वामपंथी छात्र संगठनों की मांग रहती है कि शिक्षा में अंधविश्वास फैलाने वाले, सभी सामग्री को हटाया जाए, वैज्ञानिक तर्क के आधार पर, प्रकृति के नियम से, चलने वाले विकास चक्र को, छात्रों को पढ़ाया जाना चाहिए, इतिहास में क्रांतिकारियों के इतिहास को, विस्तार पूर्वक पढ़ाना चाहिए, आजादी के इतिहास में, रानी लक्ष्मी बाई से लेकर, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस, जैसे अनगिनत क्रांतिकारियों के इतिहास को, आज की नौजवान पीढ़ी को पढ़ाया जाना चाहिए । बिना वैज्ञानिक चेतना के, हमारे देश में वैज्ञानिक विकास नहीं हो सकता, बिना वैज्ञानिक विकास किए हम महाशक्ति कभी नहीं बन सकते।

यह हमारे देश के छात्र आंदोलन का वर्गीय चरित्र है, जिसको हर नौजवान को, छात्र को, समाज के हर वर्ग को, अच्छी तरह से समझना पड़ेगा, तभी हमारे देश में, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन आएगा, तभी हम महाशक्ति बन पाएंगे, यह काम केवल देश की नौजवान पीढ़ी कर सकती है, जिस में छात्रों की अहम भूमिका होगी ।

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