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बेरोजगारी क्यों है, समाधान क्या है ।

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Ashish

ऐसे समझे की बाजार में किसी भी वस्तु की मंहगाई कब बढ़ती है, जब उस वस्तु की बाजार में ज्यादा संख्या हो, और उसको खरीदने वाले कम हो, तो वह वस्तु सस्ती हो जाएगी, बेचने वाले को डर लगा रहेगा कि कही मेरी लागत न डूब जाए ।
दूसरा ऐसे समझे जैसे टमाटर बाजार में, 100 रुपये किलो बिकता है और 5 रुपये किलो भी बिकता है, इसमें एक कमी होती है कि थोड़े समय बाद सड़ने लगता है, तब उसको बहुत कम दामो में बेचना पड़ता है, नही तो वो सड़ जाएगा ।

ऐसी ही हालत बेरोजगारी की है, थोड़ी समय के लिए, एक नौजवान श्रमिक को वस्तु समझ लेते हैं, वो बाजार में अपना श्रम बेचने के लिए खड़ा है, उसके श्रम की कीमत कैसे तय होगी, यदि बाजार में श्रमिकों की मॉग ज्यादा है, और संख्या कम है तो, उसके श्रम की कीमत ज्यादा मिलेगी, वह मॉग कर पायेगा, यदि मॉग कम है, श्रमिक ज्यादा है, तो उनके श्रम की कीमत कम होगी और चुपचाप गुलामो की तरह काम करेगा ।

ये समझने के बाद यह तो समझ आ गया कि श्रम सस्ता करने के लिए, रोजगार कम करना होगें, कुछ रोजगार खत्म करना होगें, ज्यादा नौजवानो को पढ़ा लिखा कर तैयार करना होगा । इससे क्या होगा “श्रमिक” मॉग से ज्यादा हो जाएगे, इसका परिणाम होगा कि श्रम सस्ता हो जाएगा ।

अब हम नरेंद्र मोदी जी की पूँजीवादी विचारधारा की राजसत्ता की नीतियों का आकलन करते है ।
इन्हौने क्या किया, एक सरकारी विभागो के लाखों पदो को समाप्त कर दिया, कुछ खाली पद है जिन पर भर्ती नही कर रहे है, श्रम कानूनो को खत्म किया, जिससे श्रमिक नौकरी से हटाने के डर से गुलाम बन गया । क्योंकि उसको दूसरा रोजगार नही मिलने का डर है ।
ग्रामीण क्षेत्रों की रोजगार पैदा करने वाली सरकारी योजना कम की, या खत्म की, नरेगा जैसी कई योजनाएं है, किसानों की खाद बीज की सब्सिटी खत्म की, कीटनाशक, बीज के दाम बढ़ाये, बिजली, डीजल, खेती के संसाधनों के दाम बढ़ाये, जिससे खेती में लागत, बढ़ा दी, और फसलों के कोई न्यूनतम दाम तय नहीं किये । न्यूनतम दाम का मतलब है कि सब लागत जोड़ कर, जो दाम लगता है, उसमें 40 प्रतिशत किसान का मेहनताना जोड़ कर जो दाम बने, उसको न्यूनतम दाम कहा जाए । ऐसा इन्होंने नहीं किया ।
जिसका परिणाम यह निकला कि खेती भी फायदे का सौदा नहीं बची, इससे गॉव के किसानों के बच्चे ने खेती छोड़कर शहरों की तरफ भागना शुरू किया ।
इससे क्या हुआ कि शहरों में बेरोजगारो की संख्या और बढ़ गई ।
तीसरा काम क्या किया कि बच्चों के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज, गली गली खुलवा दिए, गली गली आई टी आई खुलवा दी, पिछले 10 वर्षो में करोड़ो इंजीनियर बना दिए ।
देखिए, क्या स्तिथि बनी, बेरोजगारी बढ़ी, असुरक्षा बढ़ी, जिससे पूँजीपतियौ को क्या फायदा हुआ, कम से कम पैसे में नौजवान काम करने के लिए तैयार खड़े होने लगे, गुलामो की तरह काम करने के लिए तैयार खड़े है, कम्पटीशन है कि हम ज्यादा काम करेंगे, दूसरा कह रहा, हम ज्यादा काम करेंगे, इसी प्रकार ये दस हजार में कर रहा है, तो में आठ में करने को तैयार हूँ, ये आठ में करने को तैयार है, तो में सात में करने को तैयार हूँ, इस परिस्थिति का रिजल्ट देखें, बिना कुछ करें, गुलामो की सेना, पूँजीपतियो की सेवा के लिए खड़ी कर दी । यही राजनीति है, जिसको सबको समझना है ।

इस पूरे ऑर्टीकल का निष्कर्ष यह है कि ये बेरोजगारी पूँजीवादी विचारधारा की व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है, इसी से उनके मुनाफे बढ़ते है, खजाने भरते है, अभी हमारे देश की GDP कम हो रही है, और पूँजीपतियो के मुनाफा, बेताहासा बढ़ रहे है, मुकेश अंबानी की संपत्ति केवल एक वर्ष में 67 प्रतिशत बढ़ गई, हमें यह समझना है कि क्या ये पूँजीवादी राजसत्ता इस व्यवस्था को खत्म करेगी, क्या अंबानी अडानी जिनके चंदे से नरेंद्र मोदी जी चुनाव जीते है, क्या ये लोग इसको बदलने देगे, कभी नहीं साथियों ये उनकी संजीवनी है, जिससे वो जीवित है ।

यदि इस बेरोजगारी को खत्म करना है तो केवल एक ही रास्ता है कि पूँजीवादी विचारधारा की राजसत्ता को उखाड़ फेक कर समाजवादी विचारधारा की राजसत्ता को कायम किया जाए, जिनकी आर्थिक नीतियों इन पूँजीवादी विचारधारा की व्यवस्था से एकदम उल्टी है, तभी आम जनता के फायदे के लिए नीतियाँ बनाई जायेगी, तभी ये बेरोजगारी खत्म होगी, हमारे देश में जब तक ये पूँजीवादी राजसत्ता रहेगी, तब बेरोजगारी खत्म नही होगी, तरह तरह के रूप में, और उग्र होकर आयेगी ।
साथियों इसलिए 70 सालो में बेरोजगारी खत्म नही हुई, न अभी खत्म होने वाली है । इन गलत नीतियों से दरिद्रता बढ़ रही है, जिसको भगवान और नसीब किस्मत पुराने जन्मो का फल, भगवान, अल्लाह, ईसू, और न जाने कितने गुरु पैदा किए गए हैं, जो आपके दिमाग को असली जगह से भटका रहे है, ताकि आप इस पूँजीवादी राजसत्ता के उखाड़ फैकने के लिए खड़े न हो जाए ।

इसमें किसी धर्म का नसीब किस्मत, भगवान, अल्लाह किसी का कोई रोल नही है, यह विषय शुद्ध रूप से राजनैतिक विचारधारा की राजसत्ताओ, के विचारों से जुड़ा है । इनको बदलने से ही हमारी किस्मत, नसीब, अच्छे हो सकते है, बदल सकते है और कोई रास्ता नही है, जितना जल्दी हो सके, इसको बदलने के संघर्ष में शामिल हुआ जाए ।

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