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नरेंद्र मोदी जी, ने बनाया “फिक्स टर्म कर्मचारी”, अब पूरे देश में नौजवानो को परमानेन्ट करने की ज़रुरत खत्म

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नरेंद्र मोदी जी, नौजवानो की जिंदगी को गुलाम बनाने, उनका पूंजीपति द्वारा खुलकर शोषण दमन अत्याचार करने के सारे रास्ते खोल रहे हैं, उसी के तहत एक और गुलामी का नियम बनाया, 18 मार्च 2018 को केन्द्र सरकार ने, स्थाई आदेश ( स्टैडिग ऑर्डर) में कर्मचारी की परिभाषा में, नया श्रेणी फिक्स टर्म कर्मचारी जोड़ दिया है, इसका मतलब यह है कि अब पूरे देश में फिक्स समय के लिए एग्रीमेंट करने, वर्कर रखने की छूट मिल गई है, अब परमानेन्ट करने की ज़रुरत खत्म हो गई, अब तक कानून के अनुसार स्थाई काम के लिए स्थाई श्रमिक रखने का नियम है, ठेका मजदूर को सीधा उत्पादन में स्थाई प्रवृत्ति के काम करने का अधिकार नही था, मगर सरकारे पूँजीपतियो की है, इसलिए पूंजीपति ठेका मजदूरों से स्थाई प्रवृत्ति का काम करवा रहे थे, अब पूंजीपतियो को ठेका मजदूर रखने की भी जरुरत नहीं होगी, क्योंकि अब ये नया नाम जुड़ गया है, कंपनी नौजवान बच्चों को सीधा दो साल के लिए ट्रेनिंग में रखेगी फिर दो साल के लिए फिक्स टर्म में भर्ती करेगी और चार साल काम करवा कर बाहर निकाल देगी, इससे कंपनी को सस्ता मेनपावर मिलेगा, नौजवान बच्चों का शोषण आसानी से कर सकेगे और वेतन वृद्धि करने के लिए कोई चर्चा करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी । यह कानूनी अधिकार मिल गया । अब परमानेंट करने की कानूनी जरुरत खत्म हो गई ।
म. प्र. सरकार ने ये संशोधन बाबू लाल गौर जी जब मुख्यमंत्री थे, तब बना दिया था, जब से हमारे प्रदेश में परमानेन्ट करना लगभग बंद हो गया था।
अब नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने केन्द्र में यह संशोधन कर दिया है तो अब देश भर में खुलेआम, इसको लागू किया जाएगा और अब राज्य सरकारे भी इसको नहीं रोक पायेगी ।

इससे नौजवानो की जिंदगी बर्बाद होना सुनिश्चित हो गया, अब नौजवान बच्चो को, न अच्छा वेतन मिलेगा, (क्योकि कभी भी नौकरी से भगाने का रास्ता खुला है, दो साल में तो पक्का भगा सकते हैं, ) न रोजगार की सुरक्षा है, तो इनको न कोई बैक लोन देगे, क्योंकि परमानेन्ट नही होगे न ग्रेज्युटी मिलेगी, जीवन भर मुश्किल से अपना पेट भर पायेगे, बच्चों का कोई भविष्य नही होगा, क्योंकि इनके बाप को कभी भी नौकरी से निकाला जा सकता है, इसलिए अच्छे स्कूलो में बच्चो को नहीं पढ़ा सकते।
इतना ही नहीं आज भी नौजवानो को उनकी उम्र 25 साल के बाद कोई कंपनी काम पर नहीं रखती, क्योंकि नये नये बेरोजगार नौजवान बच्चों की लाइन लगी हुई हैं, आज भी बड़ी बड़ी कंपनियों में ये सिस्टम लगा है, अधिकतम 30 साल है, इसके बाद में या तो पकौड़े बेचो, या मजदूर पेठे पर काम के लिए खड़े हों ।

ये सब हो गया है होने वाला नहीं है, आज कारखानो में 90 प्रतिशत ऐसे ही नौजवान बच्चे काम कर रहे है, इनकी जिंदगी और भविष्य का कोई मतलब नहीं है, मगर हमारे नौजवान दिमागी रूप से गुलाम बन गए है, कुछ आवाज़ भी नहीं निकल रही है, धर्म के नाम पर दंगे फ़साद करने को बेताब दिख रहे हैं, बड़े बड़े राष्ट्रवादी बन रहे है, देशभक्त बन रहे है, तलवारे घुमा रहे है, खुद के जीवन के सवाल पर नपुसंक बन जाते है, मुंह से आवाज़ नहीं निकलती, कही विरोध कार्यवाहीयो में खड़े नहीं हो सकते, पता नहीं किस तरह की गुलामी की गोली खा ली है, खुद बीबी बच्चे मॉ बाप के जीवन के लिए सोचने की शक्ति खत्म कर ली ।

और करो मोदी मोदी, और जय श्री राम करो, मार काट करो, नरेंद्र मोदी जी ने खत्म कर दी तुम्हारी जिंदगी, और चुप रहो कब तक चुप रहते हो, देखते हैं कब धर्म के नशे से बाहर निकलते हो, जब घर में रोटी नहीं बचेगी, बच्चों के पढ़ाने के लिए पैसे नहीं होगे, कंपनी मालिक धक्के मारेगे, जब तक हो सकता है कि हमारे नौजवान को समझ में आ जाए ।

जगाना, सावधान करना मजदूर संगठन का काम है, सो कर रहे हैं, यह भी निवेदन है कि इस खबर को हर नौजवान तक पहुचाये, इतनी तो अपेक्षा कर सकते है ।

नौजवानो यही सच है जाग जाओ, पूरा देश को देशी विदेशी पूंजीपतियो को बेच रहे है, लगभग पचास प्रतिशत बिक गया है, दुनियां के पूंजीपति हमारे देश पर कब्जा कर रहे है, जनता को बर्बाद करने के कानून बनाए जा रहे है, ऐसे में इन असल सवालो से ध्यान हटाने के लिए हिंदू मुसलमान के दंगे फ़साद करवाये जा रहे है। ताकि लोग इसी जाल में फंसे रहे, सच में पूरे देश के नौजवान इस जाल में फंस गए हैं ।

जागो उठो, भारत माता को बचाओ, अपने जीवन को बचाओ, अपने बच्चो के जीवन को बचाओ ।

भगत सिंह को याद करो, इंकलाब जिंदाबाद करने का वक्त आ गया है ।
इंकलाब लाने का वक्त आ गया है । जो हमको अपना जीवन कुर्बान करके आजाद करा गया, आज हम उसको बचा भी नहीं पा रहे है, हमारा खून पानी हो गया है ।

इन गुलामी कानूनो के खिलाफ पूरे देश में हो रही विरोध कार्यवाहियों में करोड़ो की संख्या में सड़को पर निकलो । हर बड़े बड़े शहरों में मजदूर संगठन प्रदर्शन करेंगे ।

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