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#नमस्ते_ट्रंप नरेंद्र मोदी जी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती क्या राष्ट्र हित में होगी

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नरेंद्र मोदी जी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती क्या राष्ट्र हित में होगी

बहुत समय तक हमारे देश की विदेश नीति गुटनिरपेक्ष रही, 1990 के बाद अमेरिका की नई आर्थिक नीतियों के साथ हमारा देश खड़ा होना शुरू किया, आज नरेंद्र मोदी जी हमारे देश को अमेरिका का पिछलग्गू दिखाना चाहते हैं, इसी कड़ी का एक प्रोग्राम नमस्ते ट्रंप है ।
इस दोस्ती का मतलब अमेरिका के लिए व्यापार है, हमारे देश का बाजार है, नरेंद्र मोदी जी के लिए इनकी सेवा के लिए समर्पित करना और देश की अर्थव्यवस्था देशी विदेशी कंपनियों के कब्जे में सौपना, इसी नीति और समझ का नतीजा है जो साफ दिख रहा है ।
इससे किसका फायदा होगा और किसका नुकसान होगा, जब अमेरिका के इतिहास को देखते हैं तो पाते हैं कि अमेरिका ने जिस देश से दोस्ती की उसको बर्बाद करके ही दम लिया, अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक गिर सकते हैं, ईराक और अफगानिस्तान का तालिबान और ओसामा बिन लादेन को अमेरिका ने पैदा किया और बाद में उसे मारा, पाकिस्तान में सेन्य अड्डे आज भी है, उनको हटाना उनके वश में नहीं है जिस तरह से सीरिया और कई तेल पैदा करने वाले देशों पर कब्जा किया, अमेरिका ने जिस देश से दोस्ती की उस देश के आर्थिक संसाधनों पर कब्जा करके उस देश पर कब्जा जमाया, देश की सरकार को अपने हिसाब से चलने को मजबूर किया, इनका मक़सद केवल व्यापार है और व्यापार पर कब्जा है ।
इसलिए हमारे देश के लिए अमेरिका के पिछलग्गू बनना और अमेरिकी से दुश्मनी दोनों ही हमारे हित में नहीं है इसलिए गुटनिरपेक्ष रहना हमारे देश के लिए जरुरी है । ये सभी देश वासियों को समझना बहुत जरुरी है ।
अमेरिका आज दुनिया के बड़े पूंजीपतियों का नेतृत्व कर रहा है, हमारे देश में RSS BJP देशी विदेशी पूंजीपतियों के हितों के लिए काम कर रहे है इसलिए दोनों दोस्त है, ट्रंप इसलिए नरेंद्र मोदी जी को अपना दोस्त मानते है ।

इससे हमारे देश को क्या फायदा होगा और क्या नुकसान होगा, ये समझना है, इस दोस्ती से हम एक गुट में शामिल हो जाएंगे, जिससे दूसरे देशों से व्यापारिक रिश्ते खराब होगे और अमेरिकी पर निर्भर होंगे, वो हमें अपनी कंपनियों से आयात करने को मजबूर करेगा और शुल्क में कटौती करवाने का दबाव बनायेगा । जो हमारे हित में नहीं होगा ।
नरेंद्र मोदी जी देश के हितों से ऊपर पूंजीपतियों के हितों के लिए काम कर रहे है, इसलिए वो अमेरिका की उन आर्थिक नीतियों को लागू करवाने की मुहिम में लगें है जिससे हमारे देश में सारे संसाधनों पर पूंजीपति वर्ग का कब्जा हो, सरकार इससे बाहर हो जाए, इसलिए निजीकरण की मुहिम अंधे होकर चलाई जा रही है हमारी देश के संसाधनों को देशी विदेशी पूंजीपतियों को बेचा जा रहा है इसलिए ये राजनैतिक समझ न तो हमारे देश हित में है और न ही देश की जनता का कोई विकास होने वाला है, उल्टा हमारे देश की अर्थव्यवस्था देशी विदेशी पूंजीपतियों के कब्जे में होगी, ये परिणाम निकलेगा ।

RSS के चरित्र को समझने की ज़रुरत है, RSS BJP अति दक्षिण पंथी संगठन है, इस संगठन को यही देशी विदेशी पूंजीपति पालते है, जिनका लक्ष्य आम जनता को धर्म जाति क्षेत्र के विवादों में फंसाकर उनको असल मुद्दों से भटका कर, पूंजीपतियों को देश को लूटने के लिए जगह तैयार करना, वही आज नरेंद्र मोदी जी कर रहे है । ये अंतिम निष्कर्ष है ।
इसलिए इस प्रकार के प्रोग्राम देश हित में नहीं है, ये केवल देश के धन की बर्बादी है और अपने आप एक छोटा तानाशाह दिखाने की कोशिश है ।

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