देश का किसान बर्बाद तो पूरा देश बर्बाद हो जाएगा, जानिए कैसे

 

हमारा देश की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है, लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या कही न कही खेती से जुड़ी है, बहुत बड़ी आबादी का रोजगार, और उनके जीने का संसाधन कृषि है, कृषि संकट का मतलब है कि पूरी अर्थव्यवस्था पर संकट आयेगा, यह समय आज आ गया है, आज पूरे देश के हर कोने के किसान आत्महत्या कर रहे है, उनके बच्चे बड़ी संख्या में गॉवो से शहरों की तरफ, रोजगार के लिए भाग रहे है, क्योंकि खेती अब घाटे का सौदा बन गई है, ऊपर से प्राकृतिक आपदाओ से जो हानि होती, उसके भरपाई का कोई रास्ता नही है, ये क्यों हो रहा है, इसको आज समझते हैं ।

सरकारो की गलत नीतियाँ

जब से हमारे देश में उदारीकरण का दौर शुरू हुआ और खेती को पूँजीपति वर्ग के लिए खोला, तभी से इसके बर्बादी की कहानी शुरू हो गई थी, हमारी देश की आम जनता को कुछ समझ नहीं आया, पूँजीवादी राजनैतिक पार्टी भाजपा कांग्रेस दोनों ने, देश के किसानों को बड़े बड़े सपने दिखाये, मगर वे सपने भी झूठे थे, इसलिए आज किसान इस बर्बादी के जाल में फस गया। बड़े बड़े पूँजीपति वर्ग कूद गया, वायदा व्यापार आ गया, जो एक तरह का सट्टा है, जुआ है, जिसको बड़े बड़े पूँजीपति खेलते है, इनके इस खेल में किसान, फस गया।

दूसरा, किसान को खेती पर सरकारी सहायता मिलती थी, जो लगभग खत्म कर दी गई, सिचाई के बड़े संसाधनों पर सरकार खर्च करती थी, वो भी बहुत कम हो गई, खुद के संसाधन इतने मंहगे पड़ते है, जिसको किसान जुटा नही पाता, खाद बीज पर सब्सिटी लगभग खत्म कर दी गई है, खाद बीज की कंपनियॉ पहले सरकारी थी, तो उनकी दरें कम रहती थी, अब प्राईवेट पूँजीपतियो की कंपनियों से खाद बीज कीटनाशक मिल रहे है, तो दाम बहुत ज्यादा है, क्योंकि उनको तो मुनाफा कमाना है, उनको जितना मंहगा बेच सकते है, सो बेच रहे है, उनका किसानों की बर्बादी से कोई वास्ता नही है ।

तीसरा, सरकारे इन पूँजीपतियो के सामने ऐसी नतमस्तक है कि जो भी नियम है, उनको भी वो लोग नहीं मानते, सरकार उनका कुछ नहीं कर पाती, सीधा कहा जाए तो सरकार ही इन पूँजीपतियो के चंदे से बनती है, इसलिए उनकी चाकरी, चापलूसी, उनके फायदे के लिए काम करना, इनकी मजबूरी होती है। न्यूनतम समर्थन मुल्य जिनके घोषित है, वह समर्थन मुल्य पर नहीं बिकते, क्या कहे, ये सरकार है, ये इन पूँजीपतियो की दलाल, सच तो यही है कि ये सरकारे इन पूँजीपतियो की दलाल है, ये इनकी ही सरकारे है ।

चौथा, किसान एकजुट नही है, किसान को राजनैतिक रूप से समझदार नही होने दिया जा रहा है, उसको इतने सारे जगह उलझा दिया है कि उसको ये समझ नहीं आ रहा है कि में क्या करू, ये संकट आया, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और में क्या करू, वह देवी देवताओ की पूजा अर्चना करता है, अपनी किस्मत को सही करने के लिए हवन पूजन करता है, हमारा देश का किसान आज भी नहीं समझ पा रहा है, कि हमारी इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार कौन कौन है, ये हमारे दुश्मन कौन कौन है । इसलिए वो संघर्ष करने की जगह, हताशा में आत्महत्या करता है। खुद को ही खत्म कर लेता है, अनगिनत किसान इस बर्बादी के कारण अपनी जिंदगी खत्म कर चुके हैं, कभी पेड़ों पर लटक जाते, कभी कीड़ो को मारने वाली दवाई पीकर, उनके परिवारो का क्या हाल होता, इसकी कल्पना नही की जा सकती, फिर भी हम और हमारी इन पूँजीपतियो, लूटेरो की सरकारे कहती है कि हम किसान हितैषी है, शर्म हया सब मर गई है ।

नौजवानो, किसान पुत्रो, इस सच को समझो

ये बर्बादी न किसी भगवान ने दी है, न किसी की नसीब किस्मत खराब है, न हमारे पुराने जन्मो में कोई गलत कर्म थे, न भगवान का, न अल्लाह का, न ईसामसीह का, न वाह गुरु का, किसी का कोई प्रकोप है, न कोई इसके लिए जिम्मेदार है, न कोई इसको बदल सकता है, न कोई शक्ति इसको सुधार सकती है, कोई कुछ नहीं कर सकता, केवल एक ही रास्ता है, हमारे देश की सरकार को घेरना होगा, इन लुटेरी पूँजीवादी सरकारो को मजबूर करना होगा कि आप तुरंत से निम्न काम करो :-
01. जो भी फसल किसान ऊगाता है, उसकी पूरी लागत जोड़ो, उसमें 50 प्रतिशत मेहनताना जोड़ो, उसमें 20 प्रतिशत मुनाफा जोड़ो, इसको जोड़ कर जो भी बनता है, उतना समर्थन मुल्य घोषित करो ।
02. समर्थन मुल्य के नीचे जो भी खरीदी करें, उसको सीधे जेल में डालो, ऐसा कानून बनाओ ।
03. हर वर्ष इसको रिवाइज करो ।
04. किसानों को खाद बीज, पर सब्सिटी दो, इसके लिए सरकार खुद अपने कारखाने लगाए, और उसमें उत्पादन करें, उसमें कोई मुनाफा न कमाए, जो लागत लगती है, उतने मुल्य पर बेचें ।
05. ये वायदा व्यापार को तुरंत खत्म करो, इन सटोरियो को कृषि से दूर करो ।
06. उदारीकरण के दबाव में जो गलत नीतियाँ सरकारो ने बनाई है, उनको खत्म करो ।
07. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशो को लागू करो ।
08. सिचाई के साधनों के लिए सरकार अपने बजट से एक बड़ा एमाउंट निकाले और बॉध, चेक डेम, जैसे संसाधन पैदा करें ।
09. ऐसा कानून बनाओ, जो भी सरकार ने बनाये, नियम को न माने, उनको सीधा जेल में डालो, जैसे न्यूनतम समर्थन मुल्य से कम पर खरीदी करने वाले लोग ।
10. खेती से जुड़े सभी सेक्टर से देशी विदेशी पूँजीपतियो, को हटाओ, सरकार खुद अपना पैसा लगाकर संसाधन पैदा करें । कोल्ड स्टोरेज, खेती से सम्बन्धित उध्धोग सरकार खुद लगाए ।

इस प्रकार की मॉगो को लेकर इन सरकारो को घेरा जाए, इनको मजबूर कर दिया जाए की ये सरकारे, इन गलत नीतियों को पलटे, किसान के हित के हिसाब से नीतियाँ बनाए ।
मेरे किसान भाइयों इसके अलावा कोई रास्ता नही है, यही एक सही विकल्प है । दूसरा राजनीति को समझो, राजनीति करो, ऐसा कौन सा राजनैतिक दल हैं जो इन गलत नीतियों को बदलने के लिए लड़ रहा है, उसका समर्थन करो ।

इसी की एक कड़ी 20 नवम्बर को दिल्ली में होने वाली किसान संसद है, जिसमें लाखों किसान इकट्ठे हो रहे हैं, इसको सब लोग समर्थन करें ।

3 comments

    • Kapil Patidar on November 16, 2017 at 5:18 pm

    Reply

    I agree with you

    • Lekha SV on November 16, 2017 at 10:10 pm

    Reply

    I’m agreeing this article

    • Arun on November 17, 2017 at 9:37 am

    Reply

    See the contradiction in in point 1&4. On one hand you need 20%and on other hand you say without profit.
    Dear imagine if you have to deal in such business with basic knowledge do you deal.

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