जातिवादी व्यवस्था,भाग -06 समाधान क्या है? (What is the Solution of Caste System?)

जातिवादी व्यवस्था (भाग -06)

यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है यह छह भागो में लिखा जायेगा
01. पुराना इतिहास
02. आर्थिक पक्ष
03. राजनैतिक पक्ष
04. मेहनतकश वर्ग की वर्गीय एकता खत्म करती है।
05. उच्च जाति के लोगों को समझना होगा ।
06. समाधान

इन छह हिस्सो में इस विषय को कम से कम शब्दों में समझने की कोशिश करेगे, इस पर विडियो भी बनाया जाएेगा, जो इसी के साथ पोस्ट किया जाएगा ।

06. समाधान

जातिवाद से सम्पूर्ण मुक्ति का रास्ता साम्यवाद है, जो अवस्था मनुस्मृति बनने से पहले थी, इसको समझना है कि ये कैसे होगा, क्या रास्ता है और कौन इसको करेगा । इसको समझने से ही एक सही दिशा बनेगी, जिस दिशा में चलना होगा ।

पहले हमें, उसका वर्गीय चरित्र समझना जो इस व्यवस्था को बनाये और चालू रखे हैं और चालू रखना चाहते हैं, जो ये कह रहे है कि मनुस्मृति की सही संविधान है, यही हमारा पूज्यनीय ग्रंथ है, ऐसा कहने वाला सबसे पहले आर एस एस है, हिंदू महा सभा, सारे हिदुत्व वादी संगठन, राजनैतिक दलो में, भाजपा, कांग्रेस और भी बहुत सारे क्षेत्रीय पार्टी है, जो जाति व्यवस्था को खत्म नहीं करना चाहती है, केवल जातिगत राजनीति करना चाहती है । केवल वामपंथी दल है जो जातिवादी व्यवस्था के खात्मे की बात करते है और साम्यवादी व्यवस्था की कल्पना को साकार करने की बात करते है, इसलिए वामपंथी दल छुआछूत, जातिवादी ऊच नीच को बिल्कुल नहीं मानते, अंतर जातीय विवाहो को प्रोत्साहित करते हैं । इसका मतलब यह है कि पूँजीवादी विचारधारा के राजनैतिक दलो की समझ जातिवाद को जिंदा रखकर उसका उपयोग करने की है । वामपंथी विचारधारा के दल इस शोषण कारी व्यवस्था को खत्म करना चाहते हैं ।

इसका मतलब ये है कि हमें पूँजीवादी विचारधारा के सभी हिस्सों को, मेहनतकश वर्ग को हर स्तर पर कमजोर करना होगा, तभी इसको कमजोर किया जा सकता है । इसमे हमे धर्म के नाम पर जो कहा जाता है उसको भी समझना होगा, जातिवादी व्यवस्था को हिंदू धर्म में भगवान ने ऐसा करने को कहा है, ऐसा कह कर जबरदस्ती लागू किया गया, आर्थिक स्थिति के बारे में हमेशा कहा गया कि ये तो तुम्हारे नसीब किस्मत की देन हैं, पुराने जन्मो के कर्मो का फल है, इसमे मरने के बाद यमलोक में मिलने वाले दंड की तस्वीरे भी बन गई, यह पूरी एक सोच है, जिससे मेहनतकश वर्ग को दिमागी रूप से गुलाम बना कर रखे हैं । यही सोच मेहनतकश वर्ग के दिमाग पर हावी होकर डरा रही है, इसी डर के मारे मेहनतकश वर्ग के दिमाग को शून्य कर दिया जाता है । यही सुपर पावर की परिकल्पना है, ताकि आम जनता को दिमागी रूप से गुलामी में रखा जा सके और इस गुलामी को खत्म करने के लिए आवाज़ न उठाये, डरे, डर के मारे चुप रहे, इसलिए ये सुपर पावर का डर बनाया गया, सच में यह एक सोची समझी राजनैतिक साजिश है ।

इस पर तर्क से बात करे तो यह एक झूठी कहानी है जिसको गढ़कर सदियों से मेहनतकश वर्ग को गुलामी में रखा गया, इसको भी समझना है । भगवान के नाम पर बेतर्क बातो को मानने और सुनने की बिल्कुल जरूरत नहीं है । आस्था का विषय व्यक्तिगत है, यदि किसी व्यक्ति की किसी पर आस्था है तो वो उसका व्यक्तिगत मामला है, उसको आर्थिक संघर्ष में बीच में नहीं लाया जा सकता, धर्म पेट रोटी के सवाल के बाद आना चाहिए, धर्म के नाम पर थोपी जा रही कुरीतियो को बिना समझे और तर्क करने के बाद ही मानने के बारे में विचार करना चाहिए ।

हमारे जीवन का यह सबसे कठिन विषय है मगर आप एक बार सवाल करने लगेंगे तो सब कुछ साफ हो जाता है, सदियों की दिमागी गुलामी हमारे ऊपर हावी है जो अंदर से डरा देती है, मगर वामपंथी और क्रांतिकारी विचारधारा और समझ इस डर को खत्म कर देती है । इसको समझे, इसको समझना ही होगा तभी इस दिमागी गुलामी और आर्थिक गुलामी के खिलाफ लड़ा जा सकता है, इसके समझे बिना मेहनतकश वर्ग की आज़ादी की कल्पना नहीं की जा सकती है । मेहनतकश वर्ग की बड़ी एकता नहीं बन सकती, इसको सभी लोग समझे और दूसरो को भी समझाये । सब बात का समाधान है, बस हमें इस दिमागी गुलामी से बाहर निकलने की ज़रुरत है, यही अटल सत्य है, यही सच है । समाजवादी व्यवस्था ही सही दिशा है और साम्यवादी व्यवस्था ही अंतिम समाधान है । इस ओर ही मेहनतकश वर्ग को जाना ही होगा ।

ये जातिवादी व्यवस्था का सच है जिसको कम से कम शब्दों में समझने की कोशिश की गई है, सवाल है तो कमेंट बाक्स में जरूर लिखे ।

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