आत्महत्याओ को रोको, फसलों का न्यूनतम समर्थन मुल्य घोषित करो ?

 

हमारा देश गॉव से बनता है, किसान से बनता है, किसान की खुशहाली के बिना, देश खुशहाल नही हो सकता, हमारे देश में सबसे लिए आयोग बनते है, उनकी सिफारिशे तुरंत लागू हो जाती है, मगर किसानों का बड़ी मुश्किल से एक आयोग बना, जिसका नाम था स्वामीनाथन आयोग, जिसने किसानों के बारे में बड़ी गंभीरता से सिफारिशे की जिसमें एक मुख्य सिफारिश थी, किसानों को उनकी हर फसल का न्यूनतम समर्थन मुल्य, सरकार को घोषित करना चाहिए, जिसमें जो लागत,मेहनत लगती है, उसको जोड़ा जाना चाहिए, उसमें 50 प्रतिशत फायदा जोड़ा जाना चाहिए, जो भी मुल्य बनता है, उससे कम में वो फसल नही बिकनी चाहिए ।
जब इसको सुनते है तो लगता है कि इस आयोग ने बिल्कुल सत्य कहा है, मगर ये सत्य आज तक लागू क्यों नहीं हुआ ।
यदि किसानों की हालत ख़राब होगी तो पूरी अर्थव्यवस्था चरमरा जायेगी, यही हालत में, आज हमारा देश आ गया है ।
सवाल यह है कि किसानों के लिए सरकार क्यों पीछे हट रही है, जिसका न्यूनतम समर्थन मुल्य तय है, उसको लागू क्यों नहीं कर पा रही है ।
आज किसान देश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, यदि कृषि को लाभकारी नहीं बनाया गया तो हमारी अर्थव्यवस्था हर जगह से गड़बड़ा जाएगी, क्योंकि किसान उपभोगिता भी है, यदि उसकी आय कम हुई, उसकी खरीदने की क्षमता कम हुई, तो पूरा उध्धोग के उत्पादन बाजारो में नहीं बिकेगे, जब खरीददार नही बचेगे, तो उध्धोग उत्पादन करके क्या करेगे, उध्धोग नहीं चलेगे तो रोजगार घटेेगे, रोजगार घटेगे, तो देश की आर्थिक हालत खराब होगी ।
जब हमारे देश में हर वर्ग के वेतन वृद्धि, मंहगाई भत्ता, अन्य चीजों की बढ़ोतरी के लिए आयोग बनते है, उनकी सिफारिशे लागू की जाती है, तो किसानों की सिफारिशे क्यों नहीं लागू की जा रही है ।
मतलब बिल्कुल साफ है हमारे देश की पूँजीवादी राजनैतिक सरकारे, पूँजीपति वर्ग के हित साधने के लिए किसानों को लूट रहे है, जब पूँजीपतियो को छूट दी जा रही है, तो किसी से तो लूटना पड़ेगा, इनके टारगेट में सबसे अच्छा टारगेट किसान है, इसलिए सरकारे न्यूनतम समर्थन मुल्य घोषित नही कर रही है ।

यदि आज की इस खराब स्तिथि में न्यूनतम समर्थन मुल्य घोषित नहीं किया गया तो देश की पूरी अर्थव्यवस्था पीछे चली जाएगी, सरकार बिना देरी किए, कृषि को लाभकारी बनाने के लिए सारे कदम उठाने चाहिए । इसी के साथ में प्राकृतिक आपदाओ, जिसमें सूखा, और ज्यादा वर्षा, बाढ़ से हुआ, नुकसान की भरपाई की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए।
दूसरा पूरे देश में न्यूनतम वेतन कम से कम 20000 रुपये महीना घोषित किया जाना चाहिए,
यही दो कदम देश की डूबती अर्थव्यवस्था को बचायेगे ।

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