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अमीर और गरीब की परिभाषा ।

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Ashish

आज इस समझ को स्पष्ट करने की ज़रुरत है कि हम अमीर किसको कहते है और गरीब किसको कहते है, इसमें बहुत कन्फ्यूज हमारे दिमाग में है । हम इसको स्पष्ट करते है ।

पहले, अमीर, पूँजीपति, कोर्परेट घराने, इनका अर्थ एक ही है, जब भी हम इन शब्दो को लिखते है, तो उसका मतलब होता है कि जिनकी सम्पति लगभग, एक हजार करोड़ से ज्यादा है, कई हजार करोड़ है । इन्हें पूँजीपति कहते है । जिनकी संपत्ति 100 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ तक है उनको मध्यम वर्गीय पूंजीपति कहते हैं, जिनकी संपत्ति 100 करोड़ से कम है और लगभग 50 करोड़ तक है, उनको निम्नवर्गीय पूंजीपति कहते हैं, इससे कम जिसके पास भी संपत्ति है, उनको व्यापारी या दुकानदार कहते हैं। हम जब पूँजीपति या अमीर शब्द का उपयोग करते हैं, तब हमारे वो साथी जिनकी मासिक आय, तीस हजार महीना से एक लाख, दो लाख होती है, वो भी अपने आप को पूँजीपति मान लेते हैं, और वो बड़े पूँजीपति के वर्ग में अपने आप को जोड़ लेते हैं, जो वर्गीय समझ के हिसाब से सही नही है। हमारे समाज में आज ऐसी स्थिति हो गई है, कि हर एक व्यक्ति की समझ में, ऐसा सेट हो गया है कि मेरे से जो छोटा है वह गरीब है, जो गड्ढे खोदता है, खेत मजदूर है, ठेका मजदूर है, बस यही गरीब है, यही आम आदमी है, मध्यम वर्गीय परिवार जिनकी आय लगभग 100000 रुपए महीना हैं, वह अपने आप को आम आदमी भी नहीं मानते, वह पूंजीपति समझते हैं जो समझ गलत है ।
हम बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहते हैं पूंजीपति का मतलब उच्च पूंजीपति है जिस की संपत्ति 1000 करोड़ से ज्यादा है हम जहां पर भी पूंजीपति बोलते हैं उसका मतलब होता है कि हम इन पूंजीपतियों की बात कर रहे हैं ।

दूसरा, गरीब, आम आदमी, आम जनता, इसमें मुख्य रूप से ” मजदूर किसान ” का बड़ा हिस्सा आता है, जिनकी आय वर्तमान में, 250000 तक है । इसके साथ ही फुटकर व्यापारी, दुकानदार, भी इसी श्रेणी में आते हैं ।
इससे ऊपर मध्यम वर्गीय परिवार है, जिनकी आय 15 लाख तक होती है, इनको भी हम अपने वर्गीय चरित्र के साथ जोड़ते है ।
15 लाख 50 लाख वाले उच्च मध्यम वर्गीय परिवार है, जो अपने आप को अमीर, पूँजीपति मानते है, मगर वो पूँजीपति नही है ।
कर्मचारीयो को एक बात अच्छी तरह से समझना है कि वो कितना भी वेतन पाते है, वो मजदूर है, श्रमिक है, मेहनत कश है, वो पूँजीपति नही है, वो अमीर नही है, इस दिखावे कि दुनिया में हमारे कर्मचारी बड़ी संख्या में इस बीमारी के शिकार हो चुके हैं, इन साथियों को अपनी समझ को सही करना है । वो मेहनत कश वर्ग का की हिस्सा हैं ।

दोनों वर्ग की अलग अलग परिभाषाएं भी है, पूँजीपति पति उसको कहते है कि जो कुछ न करता हो, और उसकी आमदनी, मुनाफा आता हो, उसको कुछ करने की जरूरत नहीं है । इनको पता नहीं होता, हमारी कि, हमारे पास कितनी संपत्ति है । इनको पूँजीपति कहते है ।

जो मेहनत करके अपना परिवार चलाता है, वो मेहनत कश है, वो मजदूर के रूप में हो, किसान के रूप में हो, वो दुकानदार के रूप में हो, कर्मचारी, सरकारी या प्राईवेट के रूप में हो, स्टाफ, मैनेजर के रूप में हो, सब मेहनत कश वर्ग है । जिसको आम आदमी, आम जनता, गरीब, कहते है ।

इस वर्गीय बटवारे को अच्छी तरह से समझना है और आप किस वर्ग में हो, इसको सुनिश्चित करना है ।

आगे जहाँ भी पूँजीपति लिखा होगा, उसका अर्थ आप इस परिभाषा से निकालेंगे, और जहाँ भी, आम आदमी, आम जनता, गरीब लिखा है, उसका अर्थ भी उपरोक्त परिभाषा से निकालेंगे ।

यदि आपकी वर्गीय समझ सही हो गई तो आप सही राजनैतिक विचारधारा के साथ खड़े होगें, जिससे आपके हित सुनिश्चित होगें ।

 

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